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रमेश सिप्पी की शोले को 50 साल पूरे हो गए. ये बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक और क्लासिक कल्ट फिल्म में से एक है. इस फिल्म को बनाने के दौरान रमेश सिप्पी को फ्लॉप एक्टर को कास्ट न करने की चेतावनी मिली थी, लेकिन उन्होंने …और पढ़ें
डायरेक्टर को शोले से पहले लोगों ने आगाह किया था.साल 1975 की सबसे ऐतिहासिक फिल्म शोले ने बॉक्स-ऑफिस पर ऐसी तबाही मचाई थी कि हर कोई बस देखते ही रह गया था. इस फिल्म को बनाने से पहले रमेश सिप्पी को हर किसी ने आगाह किया था. हर कोई फिल्मेकर को बस यही कहता कि उन्हें फ्लॉप एक्टर अमिताभ बच्चन पर दांव नहीं लगाना चाहिए. शोले से पहले एक्टर के करियर में एक भी ऐसी फिल्म नहीं थी जो उन्हें स्टारडम का स्वाद चखा सके.

इतना ही नहीं, ब्लॉकबस्टर के साथ-साथ यह फिल्म साल 1975 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी.
रमेश सिप्पी को अमिताभ बच्चन को कास्ट न करने की सलाह मिली थी
डायरेक्टर ने फ्लॉप एक्टर पर दांव लगाने का उठाया जोखिम
अमिताभ बच्चन को शोले में कास्ट करने के जोखिम के बारे में बात करते हुए डायरेक्टर ने आगे कहा, ‘उसमें कुछ ऐसा था जो सही महसूस होता था. उन फिल्मों में कुछ अच्छी फिल्में थीं जो नहीं चलीं. आनंद (1971) में, राजेश खन्ना का किरदार बहुत ज्यादा अभिव्यक्त था, और वह ( अमिताभ बच्चन) शांत व्यक्ति थे. लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह काम करता अगर उनमें से कोई भी काम नहीं करता. यह इसलिए काम किया क्योंकि उसने शांत व्यक्ति के रूप में काम किया, जिससे दूसरे किरदार को उभरने का मौका मिला’.
अमिताभ बच्चन के शानदार अभिनय की तारीफ करते हुए रमेश सिप्पी ने कहा, “उन्होंने फिल्म की आवश्यकता के अनुसार जो भी करने को कहा गया, उसे सही तरीके से किया. उस समय की एक और फिल्म थी, बॉम्बे टू गोवा (1972), जिसमें उन्होंने बस के अंदर एक गाना गाया था जो बहुत शानदार था! इतने बड़े कद के होते हुए भी, आप देख सकते थे कि उनके शरीर की हरकत कितनी फ्री थी. वह इतने प्रभावशाली थे कि आप शायद गाने को याद न करें, लेकिन आप उन्हें जरूर याद करेंगे क्योंकि जिस तरह से वह घूमते थे, उसमें कोई असहजता नहीं थी. असहजता होनी चाहिए थी क्योंकि वह इसे महसूस कर सकते थे. लेकिन उन्हें खुद को मिलाना था, सही दिखना था, और गाते समय ताल में रहना था.’

