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कभी परदे पर चांद-सी चमकती ये अदाकारा फिर अंधेरों में गुम हो गई. उसकी अधूरी कहानी आज भी लोगों की आंखें नम कर जाती है… एक ऐसा प्यार, जो मिला तो नहीं, मगर जिंदगी भर साथ रहा.
नई दिल्ली. वो सत्तर के दशक की खूबसूरत अदाकारा थी. सुरों की मालिक भी और अदाओं की रानी भी. लाखों दिलों में बसने वाली इस हसीना ने अपने दिल की बात एक दिन खुलकर कह दी थी. उसने उस दौर के हैंडसम हीरो को पकड़कर मंदिर ले गई और कहा ‘मेरी मांग में सिंदूर भर दो…’ पर किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था. जिस पल को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना समझा, वही उसके लिए तन्हाई का सबसे गहरा दर्द बन गया. मोहब्बत अधूरी रही और वो उम्रभर उसी नाम से जुड़ी रही. कहा जाता है, जब उस एक्टर की मौत हुई तो उसने दुनिया से मुंह मोड़ लिया. जानते हैं किस एक्ट्रेस का नाम ले रहे हैं

ये कहानी है मधुर आवाज और संजीदा एक्ट्रेस सुलक्षणा पंडित की… 6 नवंबर को मुंबई के नानावटी अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया.

71 साल की सुलक्षणा का जाना हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर का एक दर्दनाक अंत है. दिल दहला देने वाला संयोग यह कि 1985 में भी 6 नवंबर को ही उनके वन साइड लव संजीव कुमार हार्टअटैक से निधन हुआ था… और 40 साल बाद सुलक्षणा पंडित के प्राण भी वैसे ही गए.

सुलक्षणा का जीवन संगीत, सिनेमा और एक अधूरी प्रेम कहानी से बुना था, जो मीरा-सी दीवानगी की तरह अमर हो गई. संजीव कुमार की जीवनी ‘एन एक्टर्स एक्टर: द ऑथराइज्ड बायोग्राफी ऑफ संजीव कुमार’ के लेखक हनीफ जावेरी ने हाल ही में विक्की लालवानी को दिए एक इंटरव्यू में एक चौंकाने वाला खुलासा किया.

हनीफ जावेरी ने बताया, ‘सुलक्षणा पंडित उनसे शादी करना चाहती थीं, लेकिन संजीव जी की दिलचस्पी नहीं थी. सुलक्षणा उन्हें मंदिर ले गईं और कहा – ‘मेरी मांग में सिंदूर भर दो’. लेकिन संजीव ने मना कर दिया.’

लेखक के मुताबिक, संजीव कुमार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह जानते थे कि वह लंबे समय तक जीवित नहीं रहेंगे और नहीं चाहते थे कि किसी की जिंदगी बर्बाद हो. हालांकि, इस रिजेक्शन ने सुलक्षणा को गहरा सदमा पहुंचाया. 1985 में जब 47 साल की उम्र में संजीव कुमार का निधन हो गया, तो सुलक्षणा पूरी तरह टूट गईं. इसके ठीक बाद उनकी मां का भी देहांत ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया.

सुलक्षणा ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘इन मौतों ने मुझे गहराई से प्रभावित किया. मेरी सेहत बिगड़ी, मैं लंबे समय तक मानसिक रूप से विचलित रहीं.’ डिप्रेशन में वे शादी से दूर रहीं और फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दीं. 2006 में बहन विजयता पंडित और जीजा आशीष श्रीवास्तव ने उन्हें घर ले जाकर सहारा दिया. 2005 में हिप फ्रैक्चर और सर्जरी के बाद वह पूरी तरह से दुनिया से अलग हो गईं.

सुलक्षणा पंडित का निधन हिंदी सिनेमा के उस दौर के अंत को दर्शाता है, जहां एक कलाकार ने अपने एकतरफा प्यार की कीमत अपनी पूरी जिंदगी देकर चुकाई.

