Last Updated:
Patna water metro- पटना के लोगों के लिए खुशखबरी है. शहर में एक छोर से दूसरे छोर जाने के लिए जाम में फंसना नहीं पड़ेगा. उत्तर भारत में पहली बार पटना में वाटर मेट्रो चलने जा रही है.
नई दिल्ली. मौजूदा समय मेट्रोपोलिटन शहरों के साथ-साथ बड़े शहरों में जाम एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. हालांकि लोगों को इससे राहत देने के लिए मेट्रो का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा है. कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई समेत 23 शहरों में मेट्रो का 1000 किमी. से लंबा नेटवर्क हो चुका है. अब सरकार मेट्रो से भी एक कदम आगे वाटर मेट्रो पर काम शुरू कर चुकी है. देश में पहली वाटर मेट्रो केरल के कोच्चि में चल रही है. इससे लोगों का समय बच रहा है. इसके साथ ही उत्तर भारत में बिहार की राजधानी पटना में वाटर मेट्रो चलाने की तैयारी हो चुकी है.
908 करोड़ का प्रोजेक्ट
पटना जल मेट्रो का पूरा प्रोजेक्ट 908 करोड़ रुपए का है. बिहार सरकार और भारतीय इनलैंड वाटरवे अथारिटी के बीच समझौत हुआ है. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना और शहर में शहरी वाटर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है.
पहले चरण में दीघा घाट से कंगन घाट तक चलेगी
वाटर मेट्रो चलाने के लिए पटना के चार संभावित रूट चुने गए हैं, जो 10 प्रमुख स्थानों को कनेक्ट करेंगे. प्रोजेक्ट के पहले चरण में दीघा घाट से कंगन घाट तक जल मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी. इस 21 किलोमीटर लंबे मार्ग पर गांधी घाट, गायघाट और कंगन घाट पर फेरी रुकेगी.
कोच्चि मेट्रो पर एक नजर
मौजूदा समय कोच्चि वाटर मेट्रो केवल छह टर्मिनल तक चल रही है. भविष्य में ये 38 टर्मिनल को कवर करेगी. कोच्चि वाटर मेट्रो के पूरी तरह से ऑपरेशन में आने बाद 34000 लोग रोजाना सफर कर सकेंगे. मेट्रो कुल 76 किमी लंबा सफर तय करेगी. वाटर मेट्रो 10 द्वीप को कनेक्ट करेगी. इसकी स्पीड 8 से 10 किमी. है. भविष्य में 78 वाटर मेट्रो संचालित होंगी.

