Friday, June 12, 2026
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भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन: 180 किमी की रेंज, 450kmph की रफ्तार; न जैमिंग का असर, न टारगेट से भटकेंगे


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नई दिल्ली22 मिनट पहले

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भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने सेना को 106 टर्बोजेट इंजन से चलने वाले ‘कामिकाजे’ ड्रोन सौंप दिए हैं। इन्हें ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ नाम दिया गया है।

यह ड्रोन 180km की रेंज तक हमला कर सकते हैं। साथ ही 450kmph की रफ्तार पकड़ सकते हैं। यानी इसकी रफ्तार दुनिया में सबसे तेज उड़ने वाले पेरेग्रिन फाल्कन पक्षी की रफ्तार 320kmph से भी ज्यादा है।

इतना ही नहीं इन पर न जैमिंग का असर होगा, न कोई स्पूफिंग के जरिए इन्हें टारगेट से भटका सकेगा। कंपनी ने कहा है कि उसने 100 ऑपरेशनल और 6 ट्रेनिंग ड्रोन सेना को सौंप दिए हैं।

यह डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और अनमैन्ड वारफेयर में उपलब्धि मानी जा रही है। इन्हें बेलारूसी फर्म केबी इंडेला की मदद से तैयार किया गया है।

कंपनी का दावा है कि यह ड्रोन पूरी तरह ऑटोनॉमस प्रिसिजन स्ट्राइक मिशन अंजाम दे सकता है। यानी लक्ष्य निर्धारित होने के बाद यह बिना किसी इंसानी दखल के मिशन पूरा कर देगा।

कामिकाजे ड्रोन्स क्या हैं…

  • कामिकाजे ड्रोन ऐसे ड्रोन होते हैं जो लक्ष्य पर हमला करते समय खुद भी नष्ट हो जाते हैं। इन्हें लॉइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है।
  • कामिकाजे नाम सेकेंड वर्ल्ड वार के कामिकाजे अटैक से लिया गया है। जब जापानी पायलट अपने विमानों को दुश्मन के जहाजों से टकराकर आत्मघाती हमला करते थे।
  • जब किसी ड्रोन लॉन्च किया जाता है, तब वह काफी देर तक हवा में मंडराता है। कैमरे और सेंसर से टारगेट खोजता है। उसके मिलने पर उसकी ओर तेजी से बढ़ता है और टकराते ही विस्फोट कर देता है।
  • इन ड्रोन्स का फायदा है कि अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। सटीक हमला कर सकते हैं। सैनिकों की जान सीधे खतरे में नहीं डालते। टैंक, रडार, तोप और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

विस्फोट का दायरा केवल 5 मीटर, यानी जानमाल का कम नुकसान

अग्निवेग में अहम मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स हब, कमांड सेंटर, रडार इंस्टॉलेशन और दूसरे रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता है। ट्रायल के दौरान अग्निवेग ने जैमिंग और स्पूफिंग वाले माहौल में काम करते हुए 5 मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया।

सरल शब्दों में कहें तो यह ड्रोन अपने टारगेट को बेहद करीब जाकर हमला करने में सक्षम है। इससे किसी सैन्य ठिकाने के केवल एक हिस्से को निशाना बनाया जा सकता है। इससे टारगेट के आसपास मौजूद सिविलियन स्ट्रक्चर का कम नुकसान होता है।

दिल्ली की कंपनी ने 6 महीने में तैयार किए, एडवांस्ड वर्जन भी बनाएगी

SMPP के सीईओ और निदेशक आशीष कंसल ने कहा कि केवल 6 महीने के भीतर भारतीय सेना को ड्रोन की आपूर्ति करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सटीकता, स्वायत्तता और कॉस्ट इफेक्टिव हो रहे हैं। ऐसे सिस्टम युद्धक्षेत्र में ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित हो रहे हैं।

अग्निवेग में 75% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने सेना को अग्निवेग का एडवांस्ड वर्जन देने की पेशकश भी की है।

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