भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। वायरल वीडियो की जांच के आधार पर शाहपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित सभी पुलिसकर्मियों का नाम सामने आया है। जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक हरिश्चंद्र कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं। पहले सिर्फ राजेश कुमार मालाकार का ही नाम सामने आया था। लगातार कार्रवाई की उठ रही मांग बताया जा रहा है कि एनकाउंटर प्रकरण से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इन वीडियो में पुलिस कार्रवाई और घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर उठे सवालों के बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया सेवा नियमों के उल्लंघन और आचरण संबंधी गंभीर सवाल सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई बिलौटी गांव में हुए इस एनकाउंटर को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। ऐसे में पांच पुलिसकर्मियों के निलंबन को पूरे प्रकरण में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस मुख्यालय की इस कार्रवाई के बाद मामले की आगे की जांच और जिम्मेदारियों के निर्धारण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ADG ने मानी लापरवाही वहीं, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में ADG सुधांशु कुमार ने पुलिस की लापरवाही मानी है। उन्होंने पटना में सोमवार को कहा कि एनकाउंटर से पहले 16 जून जो पुलिस वाले उससे बात करने गए वो उसे ठीक से हैंडल नहीं कर पाए। लापरवाही पर हमने एक SHO, 2 SI, एक ASI और एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी को किया तलब एनकाउंटर मामले में अधिवक्ता एसके झा की याचिका पर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के एसपी को तलब किया है। साथ ही आयोग ने चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी हैं। 13 जुलाई को आयोग पूरे मामले की समीक्षा करेगा। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला इधर इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस नागरत्ना ने मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि आप रजिस्ट्रार के सामने मेंशन कीजिए। वो इस केस को सुनवाई के लिए लिस्ट करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर कर एनकाउंटर की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा और जल्द सुनवाई की मांग की। विशाल तिवारी अपना पक्ष रखते हुए कहा- पुलिस अक्सर एनकाउंटर का एक जैसा कारण बताती है। आरोपी ने पुलिस की बंदूक छीन ली, भागने लगा और पुलिस पर हमला करने की कोशिश की, इसलिए आत्मरक्षा में चलानी पड़ी। ये फर्जी एनकाउंटर है। कोर्ट को इस केस में दखल देकर जांच का आदेश देना चाहिए। एनकाउंटर को लेकर अलग-अलग दावे शक पैदा कर रहे याचिका में दावा किया गया है कि एनकाउंटर को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे घटना को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है। भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं, जिनकी सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य पुलिस से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है। ऐसे में न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र जांच ही जनता का भरोसा कायम कर सकती है। जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का अनुरोध है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर पूरे घटनाक्रम की निगरानी में जांच कराने की भी मांग की गई है। परिवार से खेसारी लाल यादव ने की मुलाकात सोमवार को एक्टर खेसारी लाल यादव भरत तिवारी के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। उनके साथ भोजपुरी गायक गुंजन सिंह, राजद के कई नेता और समर्थक भी मौजूद रहे। खेसारी ने आरोप लगाया कि व्यवस्था में अपराध को समाप्त करने के बजाय कई बार ऐसे कदम उठाए जाते हैं, जिन पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं आरजेडी की एक उच्चस्तरीय जांच टीम ने भी आज भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। 3 तस्वीरों में समझिए पूरा घटनाक्रम…
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