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Jagre wali baati: भरतपुर की पारंपरिक जगरे वाली बाटी अपने देसी स्वाद और अनोखी खुशबू के लिए जानी जाती है. उपलों की धीमी आंच पर पकने के कारण इसमें हल्का धुएं का फ्लेवर और बाहर से कुरकुरी, अंदर से मुलायम टेक्सचर मिलता है. घी में डुबोकर दाल या लहसुन की चटनी के साथ परोसी जाने वाली यह बाटी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि भरतपुर की जीवंत परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है.
भरतपुर. पारंपरिक व्यंजनों की बात हो और जगरे वाली बाटी का जिक्र न आए ऐसा हो ही नहीं सकता. यह खास बाटी यहां के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की पहली पसंद है. देसी अंदाज में तैयार होने वाली यह बाटी अपने अनोखे स्वाद खुशबू और बनाने की पारंपरिक विधि के कारण अलग पहचान रखती है. खास बात यह है कि इसे आधुनिक गैस या ओवन में नहीं बल्कि पुराने तरीके से जगरे यानी उपलों की आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसमें हल्की धुएं की सुगंध और देसी फ्लेवर आ जाता है.
जगरे वाली बाटी को धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिसके कारण यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से बेहद मुलायम बनती है. यही कारण है कि इसका स्वाद सामान्य बाटी से काफी अलग और लाजवाब होता है. भरतपुर में खास मौकों, त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में इसे बनाना एक परंपरा बन चुकी है. गांवों में आज भी लोग इस पारंपरिक तरीके को जीवित रखे हुए हैं. वहीं शहरों में भी इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.
आसान है इसे बनाने की रेसिपी
अगर इसके बनाने की प्रक्रिया की बात करें तो सबसे पहले गेहूं के आटे और बेसन के साथ सौंफ और अजवाइन मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. इसके बाद आटे को दूध के साथ गूंथा जाता है, जिससे बाटी का टेक्सचर मुलायम और स्वाद दोगुना हो जाता है. आटा तैयार होने के बाद इसके गोल-गोल आकार के गोले बना लिए जाते हैं. इसके बाद आता है इसका सबसे खास चरण, जगरे तैयार करना. इसके लिए उपलों को एक जगह इकट्ठा करके आग लगाई जाती है. जब उपले अच्छी तरह जलकर लाल अंगारों में बदल जाते हैं.
तब इन आटे के गोलों को उसमें दबाकर पकने के लिए छोड़ दिया जाता है. धीमी आंच पर ये बाटियां धीरे-धीरे सिकती हैं और उनमें धुएं की खास खुशबू समा जाती है. पकने के बाद बाटियों को बाहर निकालकर कपड़े से साफ किया जाता है. फिर उन्हें घी में डुबोया जाता है, जिससे उनका स्वाद और भी बढ़ जाता है. तैयार जगरे वाली बाटी को लहसुन की चटनी या दाल के साथ परोसा जाता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है. जगरे वाली बाटी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि भरतपुर की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है. वैसे तो यह बाटी पूरे राजस्थान में बनाई जाती है, लेकिन हर जगह की बनाने की विधि अलग अलग होती है. इसका देसी स्वाद और पारंपरिक बनाने का तरीका आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

