‘बिल्डिंग से कहीं-कहीं से धुआं निकल रहा था। पता चला कि इसके अंदर लोग फंसे हुए हैं। हमने पत्थर मार-मारकर कांच तोड़े तो 4-5 लोग नीचे उतरे। इस दौरान फायर ब्रिगेड को पहुंचने में देर तो हुई, वर्ना 15 लोग बच जाते।’ ‘आधा घंटा नहीं, 1 घंटे लेट पहुंची थी फायर ब्रिगेड। अगर 15-20 मिनट लेट पहुंचती तब भी 15 बच्चों की जान बच जाती।’ ऐसे आरोप लखनऊ अग्निकांड के प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ितों ने लगाए। इन आरोपों के बाद दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने स्थिति को परखा। इसके लिए घटनास्थल से सबसे नजदीकी फायर ब्रगेड स्टेशन की दूरी स्कूटी से नापी। समय वही चुना, जब आग लगी थी- दोपहर 3 बजे के आसपास। रिकॉर्ड की बात करें तो फायर स्टेशन पर सूचना 2:27 बजे दी गई। वहीं, अलीगंज थाने में दर्ज FIR के अनुसार 2:30 बजे आग लगी। इस रिपोर्ट में पढ़िए लोगों के आरोप, जानिए घटनास्थल के हालात और दोपहर 3 बजे कपूरथला से इंदिरानगर फायर स्टेशन के बीच की ट्रैफिक। पहले मैप देखिए- अब देखिए बिल्डिंग की हालत- अब पूरी घटना जानिए- राजधानी के अलीगंज इलाके में 2 मंजिला इमारत में 22 जून को आग लगी। इसमें 5 लोगों ने किसी तरह पाइप और तार के सहारे उतरकर खुद को बचा लिया। एक युवक आग के दौरान नीचे कूद गया, जिससे पैर पैरालाइज हो गए। हादसे में दूसरे फ्लोर पर थ्रीडी एनिमेशन सेंटर पर मौजूद 15 युवाओं की मौत हो गई। 23 जून को SIT और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर जांच और पूछताछ की। दो सदस्यीय SIT यहां के बाद KGMU पहुंची। वहां भर्ती सभी घायलों से बातचीत कर हादसे की स्थिति जानी। उसी दिन सभी मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम कर उनके परिजनों को सौंप दिए गए। हादसे के बाद LDA ने बिल्डिंग ढहाने का आदेश दिया। रियलिटी चेक में 20 में स्कूटी से पहुंचा रिपोर्टर अलीगंज अग्निकांड की जगह से जो सबसे करीबी फायर स्टेशन है, वह इंदिरानगर है। दोनों जगहों के बीच की दूरी लगभग 6.2 किलोमीटर है। गूगल मैप पर यह दूरी फोरव्हीलर से 18 मिनट में दिखा रही है। रिपोर्टर जब इसी दूरी को स्कूटी से मापने पहुंचा, तो 20 मिनट में घटनास्थल से फायर स्टेशन पहुंच गया। हालांकि, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां स्कूटी के बराबर नहीं होतीं। एक हाइड्रोलिक मशीन भी पहुंची थी। कुल 19 गाड़ियां थीं, जो कई फायर स्टेशनों से पहुंची थीं। अब पढ़िए पीड़ितों और चश्मदीदों को- …लेकिन फायर ब्रिगेड को आने में थोड़ी देरी हुई प्रत्यक्षदर्शी साहिल जोशी ने बताया- मैं यहां से बाइक से गुजर रहा था। आग कैसे शुरू हुई इसके बारे में नहीं पता। यहां धुआं उठ रहा था। नीचे से लोगों ने पत्थर मारकर शीशे तोड़े। अंदर से 3-4 लड़के तार से लटकते हुए नीचे आए। कई बच्चे अंदर ही फंसे थे। इस पूरे घटनाक्रम में 20-25 मिनट हो गए। यहां सब लोग फायर ब्रिगेड और पुलिस को कॉल कर रहे थे। लेकिन, फायर ब्रिगेड के आने में थोड़ी देरी हुई। ‘फायर की गाड़ियां देर से आईं, इसलिए समस्या हुई’ हादसे की चश्मदीद कामिनी ने बताया- जब आग लगी तो मैं घर पर ही थी। चीख-पुकार मचने पर बाहर निकली तो देखा कि अफरा-तफरी का माहौल था। लोग इमारत पर ईंट मार रहे थे, ताकि शीशा टूट जाए और धुआं बाहर निकल जाए। शीशा टूटते ही इमारत से लटककर लोग कूदने लगे। चाहकर भी हम, लोगों की मदद नहीं कर पाए। फायर की गाड़ियां भी देर से आईं, इसलिए बहुत समस्या हुई। फायर की गाड़ियां आधे घंटे से ज्यादा देरी से पहुंचीं। ‘आधा नहीं, 1 घंटे से भी लेट आई फायर ब्रिगेड’ हादसे में जान गंवाने वाले नीलेश की भाभी रेनू ने कहा कि इस घटना के बाद मौत की सबसे बड़ी वजह फायर ब्रिगेड की गाड़ी का देर से आना। उन्होंने गाड़ियों के आधा घंटे में पहुंचने की बात काटते हुए कहा- पूरे 1 घंटे के बाद आग बुझाने वाली गाड़ी पहुंची। अगर 10 या 20 मिनट देरी से आती तो बच्चों की जान बच जाती। एक घंटे देर से आने की वजह से मैंने अपने देवर को खो दिया। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची, इस वजह से 15 बच्चे अब नहीं रहे। ‘फायर ब्रिगेड हमेशा देर से आती है’ बख्शी का तालाब के शुभम मिश्रा हमें घटनास्थल पर मिले। उन्होंने कहा- फायर ब्रिगेड की टीम हमेशा लेट पहुंचती है। फायर ब्रिगेड की सबसे बड़ी लापरवाही है। अगर वह समय पर आते तो इतनी मौतें न होतीं। 2 महीने पहले मेरी दुकान में भी आग लगी थी। जब पूरा माल जल गया था, तब फायर ब्रिगेड पहुंची। जैसे चौराहों पर पुलिस की गाड़ियां खड़ी रहती हैं, उसी तरह फायर ब्रिगेड की भी गाड़ी खड़ी रहनी चाहिए। कोई हादसा होता है तो हादसे के बाद गाड़ी आती है। उसके पहुंचने में समय लगता है, इसलिए हर चौराहे पर फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी तैयार हालत में होनी चाहिए। अंत में 2 तस्वीरें रियलिटी चेकिंग की- —————————– संबंधित खबर भी पढ़िए-
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‘फायर ब्रिगेड को देर हुई, वर्ना 15 लोग बच जाते’: लखनऊ अग्निकांड के बाद आरोप; भास्कर रिपोर्टर ने स्कूटी से नापी घटनास्थल की दूरी – Lucknow News
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