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कई कर्मचारी यह मानते हैं कि उनके PF खाते में जमा पूरा पैसा कभी भी निकाला जा सकता है. लेकिन हकीकत इससे अलग है. EPFO ने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PF निकासी के लिए कुछ तय नियम बनाए हैं. ऐसे में अगर आप भी अपना पूरा PF बैलेंस निकालने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
नौकरी करते हुए पूरा PF नहीं निकाल सकते! जानिए कब मिलती है 100% निकासी की अनुमति. (Representative Image: AI)
नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना का मुख्य उद्देश्य नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना है. हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से इसमें योगदान जमा किया जाता है, जिस पर EPFO समय-समय पर ब्याज भी देता है. पिछले कुछ वर्षों में EPFO ने सदस्यों की सुविधा के लिए कई डिजिटल सेवाएं शुरू की हैं और अब EPFO 3.0 की भी चर्चा हो रही है. इससे PF से जुड़े काम पहले से ज्यादा आसान और तेज होने की उम्मीद है. हालांकि, इस डिजिटल बदलाव का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सदस्य अपनी इच्छा से किसी भी समय पूरा PF बैलेंस निकाल सकेंगे. EPFO के मौजूदा नियम अब भी पूरी निकासी पर कुछ स्पष्ट शर्तें लागू करते हैं.
किन परिस्थितियों में 100 प्रतिशत PF निकासी की अनुमति?
EPFO के नियमों के अनुसार, पूरा PF बैलेंस निकालने की अनुमति केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है. सबसे सामान्य स्थिति रिटायरमेंट की होती है. जब सदस्य 58 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तब वह अपने EPF खाते का अंतिम निपटान (Final Settlement) कराकर पूरी राशि निकाल सकता है. इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है और लगातार बेरोजगार रहता है, तब भी उसे चरणबद्ध तरीके से पूरी राशि निकालने का अधिकार मिलता है. मौजूदा नियमों के अनुसार, नौकरी छूटने के एक महीने बाद सदस्य अपने PF का 75 प्रतिशत तक निकाल सकता है. यदि दो महीने तक नई नौकरी नहीं मिलती, तो वह शेष 25 प्रतिशत राशि निकालने के लिए भी आवेदन कर सकता है. यह व्यवस्था बेरोजगारी के दौरान आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से बनाई गई है.
नई नौकरी मिलने पर PF निकालना सही फैसला नहीं माना जाता
कई कर्मचारी नई कंपनी में जॉइन करने से पहले अपना पूरा PF निकाल लेते हैं. लेकिन EPFO ऐसा करने की सलाह नहीं देता. यदि आप नौकरी बदल रहे हैं, तो बेहतर विकल्प यह है कि अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से पुराने PF खाते को नई कंपनी से जोड़ दें. इससे आपका पुराना बैलेंस सुरक्षित रहता है, उस पर ब्याज मिलता रहता है और आपकी नौकरी का रिकॉर्ड भी लगातार बना रहता है. बार-बार PF निकालने से आपकी रिटायरमेंट की बचत कम हो सकती है. कुछ मामलों में समय से पहले निकासी करने पर टैक्स संबंधी प्रभाव भी पड़ सकते हैं. इसलिए विशेषज्ञ भी नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर को ही सबसे बेहतर विकल्प मानते हैं.
नौकरी के दौरान भी मिल सकती है PF की रकम, लेकिन पूरी नहीं
हालांकि नौकरी करते समय पूरा PF निकालना संभव नहीं है, लेकिन EPFO कई जरूरी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी यानी एडवांस की सुविधा देता है. सदस्य उच्च शिक्षा, शादी, घर खरीदने, मकान बनाने, होम लोन चुकाने, गंभीर बीमारी के इलाज और कुछ अन्य विशेष परिस्थितियों में अपने PF खाते से तय सीमा तक राशि निकाल सकते हैं. हर उद्देश्य के लिए अलग-अलग पात्रता शर्तें और निकासी की सीमा तय होती है. कई मामलों में कर्मचारी की नौकरी की अवधि भी महत्वपूर्ण होती है. यानी जरूरत पड़ने पर सदस्य अपनी बचत का एक हिस्सा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन पूरा फंड निकालने की अनुमति सामान्य परिस्थितियों में नहीं होती.
पूरी निकासी से पहले सोच-समझकर लें फैसला
PF सिर्फ एक बचत खाता नहीं, बल्कि लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार माना जाता है. इसमें कर्मचारी के योगदान के साथ नियोक्ता का हिस्सा और हर साल मिलने वाला ब्याज भी जुड़ता रहता है, जिससे समय के साथ बड़ी राशि तैयार होती है. यदि बिना किसी जरूरी कारण के पूरा PF निकाल लिया जाता है, तो रिटायरमेंट के समय आर्थिक सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है. इसलिए यदि आप केवल नौकरी बदल रहे हैं या तत्काल पैसों की जरूरत नहीं है, तो PF को खाते में ही रहने देना अधिक फायदेमंद माना जाता है. EPFO का उद्देश्य भी यही है कि कर्मचारी अपनी भविष्य निधि को लंबे समय तक सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर तय नियमों के तहत ही उसका उपयोग करें. इसलिए पूरा PF निकालने का फैसला लेने से पहले नियमों को अच्छी तरह समझना और अपनी भविष्य की वित्तीय जरूरतों का आकलन करना बेहद जरूरी है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

