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ओडिशा में धार्मिक पर्यटन और तटीय कनेक्टिविटी को नई ताकत देने के लिए रेलवे ने पुरी-कोणार्क रेल लाइन परियोजना पर काम तेज कर दिया है. इस नई रेल लाइन के शुरू होने से जगन्नाथ धाम पुरी और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के बीच सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. साथ ही तटीय गांवों में विकास, रोजगार और पर्यटन कारोबार को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
पुरी-कोणार्क रेल लाइन से बदलेगी ओडिशा की तस्वीर. (Representative Image:AI)
नई दिल्ली. ओडिशा में पर्यटन और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रेलवे ने पुरी-कोणार्क नई रेल लाइन परियोजना पर काम तेज कर दिया है. यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भविष्य में राज्य के प्रस्तावित तटीय रेल त्रिकोण-भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क-का अहम हिस्सा बनने जा रहा है. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. खास बात यह है कि जगन्नाथ धाम पुरी और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के बीच अभी तक सीधी रेल सेवा मौजूद नहीं है, जबकि दोनों शहर समुद्र तट के किनारे करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.
रेलवे ने तेज की निर्माण और जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया
रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को फरवरी 2024 में मंजूरी दी थी और बाद में इसे स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट घोषित किया गया. अब ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) इसके निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. अधिकारियों के अनुसार 32 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है. परियोजना के लिए करीब 521 एकड़ जमीन की जरूरत है, जिसमें निजी और सरकारी दोनों तरह की जमीन शामिल है. रेलवे का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना में 138.38 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है ताकि निर्माण और भूमि अधिग्रहण का काम बिना रुकावट जारी रह सके.
पुरी और कोणार्क के बीच सफर होगा आसान
पुरी का जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क का सूर्य मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. हर साल लाखों लोग इन दोनों धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचते हैं. फिलहाल यात्रियों को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है, जिससे यात्रा में ज्यादा समय लगता है. नई रेल लाइन शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा तेज और आरामदायक हो जाएगी. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और स्थानीय कारोबार को भी फायदा पहुंचेगा.
तटीय गांवों में बढ़ेगा विकास और रोजगार
रेलवे परियोजना केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे तटीय इलाकों के आर्थिक विकास को भी नई ताकत मिलने की उम्मीद है. जिन गांवों से होकर यह रेल लाइन गुजरेगी, वहां पर्यटन से जुड़े कारोबार, होटल, छोटे व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ाती है. ऐसे में पुरी-कोणार्क रेल लाइन ओडिशा के कई तटीय गांवों की तस्वीर बदल सकती है.
पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना
इस परियोजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि रेल लाइन का रूट इस तरह तैयार किया गया है कि किसी भी वन क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के लिए किसी भी फॉरेस्ट लैंड का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. यह फैसला पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह इलाका पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. पर्यावरण समूहों ने भी इस पहल को राहत देने वाला कदम बताया है.
ओडिशा के पर्यटन क्षेत्र को मिल सकती है नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि पुरी-कोणार्क रेल परियोजना भविष्य में ओडिशा के पर्यटन क्षेत्र की दिशा बदल सकती है. बेहतर रेल संपर्क से घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है. इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. रेलवे की यह परियोजना केवल दो शहरों को जोड़ने का काम नहीं करेगी, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास का नया रास्ता भी खोल सकती है. आने वाले वर्षों में यह रेल लाइन ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिनी जा सकती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

