Monday, May 11, 2026
Homeराज्यउत्तरप्रदेशनाबालिग पत्नी को पति की अभिरक्षा में सौंपने से इंकार: हाईकोर्ट...

नाबालिग पत्नी को पति की अभिरक्षा में सौंपने से इंकार: हाईकोर्ट ने कहा-पत्नी बालिग होने तक बाल सुरक्षा गृह में रहे, उसके बाद मर्जी से जहां चाहे जाए – Prayagraj (Allahabad) News



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी को उसके पति की अभिरक्षा में सौंपने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची की पत्नी को बालिग होने तक बाल सुरक्षा गृह में रखा जाए। बालिग होने पर उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे, जिसके साथ चाहे रहने की स्वतंत्रता होगी। कोर

.

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने देवरिया निवासी युवक व उसकी नाबालिग पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। देवरिया के गौरी बाजार थाने में नाबालिग किशोरी के पिता ने पुत्री के अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया। वह जमानत पर छूट गया। मेडिकल जांच में किशोरी 29 सप्ताह की गर्भवती पाई गई। उसने अपने बयान में कहा कि वह अपनी मर्जी से युवक से शादी करने के बाद पति-पत्नी के रूप में रह रही थी। प्रमाणपत्रों के आधार पर किशोरी के नाबालिग साबित होने पर उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश किया गया, जहां किशोरी ने अपने परिजनों के साथ जाने से इनकार कर दिया। इस पर कमेटी ने उसे राजकीय बाल गृह बलिया भेज दिया। पति ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर पत्नी की रिहाई की मांग की।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि किशोरी अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती। उसने पति के साथ रहने की इच्छा जताई है।

कोर्ट ने स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि किशोरी की आयु 15 वर्ष 7 महीने और 13 दिन है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को उसके पति के साथ रहने की अनुमति देना उसे यौन शोषण के जोखिम में डाल सकता है और यह पॉक्सो एक्ट के तहत नए अपराध का कारण बन सकता है। ऐसे में कोर्ट ने किशोरी को उसके बालिग होने तक बाल गृह में ही रखने का आदेश दिया। कहा कि बालिग होने के बाद बिना किसी शर्त के उसे रिहा किया जाएगा। वह जहां चाहे, जिसके साथ चाहे रहने को स्वतंत्र होगी।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments