Tuesday, June 30, 2026
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दुनिया की लोकप्रिय शराब बनने का 800 साल का सफर, कभी दवा की तरह पीते थे इसे


Brandy History: आपने ब्रांडी का नाम तो जरूर सुना होगा. भारत में इसे अक्सर सिर्फ शराब की तरह नहीं, बल्कि एक दवा के तौर पर भी देखा जाता है. जब कड़ाके की ठंड होती है तो घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर छोटे बच्चों को एक चम्मच ब्रांडी देने या उनके तलुओं, पेट और पीठ पर इसकी मालिश करने की सलाह देते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यह वास्तव में क्या है? ब्रांडी में अल्कोहल होता है, जो शरीर को अंदर से गर्माहट देता है. इसके साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं जो ठंड और सर्दी से लड़ने में मदद करते हैं. ब्रांडी को वाइन से डिस्टिल्ड करके (आसवन प्रक्रिया द्वारा) बनाया जाता है. इसका नाम डच भाषा के शब्द ‘ब्रांडेविडन’ से आया है, जिसका मतलब है ‘जली हुई शराब’. इसमें आमतौर पर 35% से 60% अल्कोहल होता है.

ब्रांडी एक ऐसी स्पिरिट है जिसने सदियों से दिलों को गर्माहट दी है. यह अपने स्वाद की तरह ही समृद्ध और जटिल इतिहास समेटे हुए है. एक औषधि  के रूप में अपनी शुरुआत से लेकर परिष्कृत (Refined) ड्रिंक के रूप में अपनी पहचान बनाने तक समय के साथ ब्रांडी का सफर एक यादगार कहानी है. ब्रांडी की उत्पत्ति प्राचीन सभ्यताओं में देखी जा सकती है, जहां इसे शुरू में एक औषधि के रूप में डिस्टिल्ड किया जाता था. इस प्रक्रिया में शराब को गर्म करके पानी से अल्कोहल अलग किया जाता है. यह प्रक्रिया सबसे पहले सातवीं शताब्दी में अरबों द्वारा अपनायी गयी थी. हालांकि, ब्रांडी जिसे उसे हम आज उसे मौजूदा रूप में जानते हैं यूरोप में बारहवीं शताब्दी तक नहीं उभरी थी.
ब्रांडी अपने स्वाद की तरह ही समृद्ध और जटिल इतिहास समेटे हुए है.

आवश्यकता से विलासिता तक
मध्य युग में ब्रांडी का उपयोग मुख्यतः औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता था. माना जाता था कि यह विभिन्न बीमारियों को ठीक करती है और जीवन को लम्बा खींचती है. भिक्षुओं और कीमियागरों ने इसके उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और विभिन्न डिस्टिलेशन तकनीकों के साथ प्रयोग किए. 14वीं शताब्दी तक ब्रांडी का उत्पादन पूरे यूरोप में फैल गया था. फ्रांस और स्पेन जैसे क्षेत्रों में इसे एक पेय के रूप में खास तौर से लोकप्रियता मिलने लगी. जैसे-जैसे व्यापार मार्ग विस्तृत होते गए और यूरोपीय खोजकर्ता नए क्षेत्रों में प्रवेश करते गए, ब्रांडी एक मूल्यवान वस्तु बन गयी. इस स्पिरिट को अक्सर लकड़ी के बैरल में ले जाया जाता था और इसी तरीके से संयोगवश ब्रांडी को पुराना करने की खोज हुई. ओक बैरल में बिताए गए समय ने ब्रांडी को एक मधुर और समृद्ध स्वाद दिया, जिससे यह एक साधारण स्पिरिट से एक शानदार ड्रिंक में बदल गयी.

कैसे बनी एक वैश्विक सनसनी
17वीं शताब्दी तक ब्रांडी यूरोपीय अभिजात वर्ग के बीच एक पसंदीदा पेय के रूप में स्थापित हो चुकी थी. विशेष रूप से फ्रांस का कॉन्यैक क्षेत्र दुनिया के कुछ बेहतरीन ब्रांडी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हो गया. कॉन्यैक एक प्रकार की ब्रांडी है जो विशिष्ट अंगूर की किस्मों से बनायी जाती है और इसे सख्त नियमों के तहत तैयार किया जाता है. इसने गुणवत्ता और शिल्प कौशल के मानक स्थापित किए. इस बीच स्पेन, इटली और अमेरिका जैसे अन्य क्षेत्रों ने अपनी ब्रांडी विकसित करना शुरू कर दिया. इनमें से हर एक की अपनी विशिष्ट विशेषताएं थीं. उदाहरण के लिए स्पेन में शेरी ब्रांडी का उत्पादन एक महत्वपूर्ण उद्योग बन गया. जबकि अमेरिकी ब्रांडी ने औपनिवेशिक काल के दौरान लोकप्रियता हासिल की, जो अक्सर सेब से बनाई जाती थी.
कहा जाता है कि ब्रांडी की एक बोतल आपके होम बार में जरूर होनी चाहिए.

क्या सेहत के लिए फायदेमंद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रांडी का कम मात्रा में सेवन करने से कई लाभ मिल सकते हैं. यह नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकती है. ब्रांडी हृदय (Heart) के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और उसे सही ढंग से कार्यशील रखने में भी मदद कर सकती है. इसमें कुछ ऐसे यौगिक (कंपाउंड) और एसिड पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने और फैलने को रोकने में सहायक हो सकते हैं. यह भोजन को पचाने और आपके पाचन तंत्र (Digestive System) को दुरुस्त रखने में भी मदद करती है. इन्हीं फायदों के कारण अक्सर कहा जाता है कि ब्रांडी की एक बोतल आपके होम बार में जरूर होनी चाहिए. ब्रांडी किसी भी अवसर के लिए उपयुक्त है. यह एक ऐसा स्वादिष्ट पेय है जो किसी भी भोजन या पार्टी की रौनक बढ़ा सकता है.

आज के दौर में ब्रांडी
आज ब्रांडी दुनिया भर में प्रसिद्ध है. फ्रांस के परिष्कृत कॉन्यैक से लेकर फलों वाली अमेरिकी ब्रांडी तक, यह स्पिरिट कई तरह के स्वाद और शैलियां प्रदान करती है. चाहे इसे शुद्ध रूप से लिया जाए, कॉकटेल में, या रात के खाने के बाद डाइजेस्टिफ के रूप में. ब्रांडी परिष्कार और भोग का प्रतीक बनी हुई है. आधुनिक उत्पादन तकनीकों ने और भी अधिक प्रयोग और नवाचार की गुंजाइश पैदा की है. जहां डिस्टिलर ब्रांडी की अनूठी वैरायटी तैयार कर रहे हैं जो उनके क्षेत्र की मिट्टी और परंपराओं को दर्शाती हैं. परिणामस्वरूप ब्रांडी की लोकप्रियता बढ़ी है. खासकर युवा पीढ़ी के बीच जो इसके समृद्ध इतिहास और टाइमलेस आकर्षण की सराहना करती है. हालांकि, ब्रांडी एक महंगा पेय हो सकता है, लेकिन यह एक ऐसा तोहफा है जिसे लंबे समय तक याद रखा और इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये कुछ ऐसे ब्रांडी ब्रांड जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए जो भारत में उपलब्ध हैं…

1. हेनेसी: 7 से लेकर 15,000 रुपये
2. रेमी मार्टिन: 11 से लेकर 14,000 रुपये
3. कौरवोइज़ियर: 5500 से 8000 रुपये
4. मार्टेल: 5500 से 8000 रुपये
5. टोरेस: 2500 से 3500 रुपये
6. सेंट- रेमी: 2500 से 3000 रुपये
7. हनी बी प्रीमियम ब्रांडी: 750 से 900 रुपये
8. मॉर्फियस: 1100 से 1600 रुपये
9. मैकडॉवेल्स नंबर 1: 800 से 1000 रुपये
10. ओल्ड एडमिरल: 600 से 800 रुपये
(ये अनुमानित कीमतें दिल्ली में मिलने वाली ब्रांडी ब्रांड के आधार पर हैं. भारत में अधिकांश देसी (Indian Made) ब्रांडी का ABV 42.8% होता है, जबकि इम्पोर्टेड कॉन्यैक/ब्रांडी का ABV आमतौर पर 40% होता है)



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