डूंगरी बांध परियोजना के विरोध में आयोजित महापंचायत जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
ग्राम पंचायत जोड़ली में शुक्रवार को डूंगरी बांध परियोजना के विरोध में आयोजित महापंचायत राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और नेताओं के टकराव के बीच समाप्त हुई। महापंचायत में घोषणा की गई कि यदि 1 दिसंबर तक मुख्यमंत्री से वार्ता सफल नहीं होती है, तो 10 दिसंबर से
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डूंगरी बांध परियोजना के विरोध में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
यह महापंचायत जोड़ली के पावर हाउस प्रांगण में डूंगरी बांध विरोध संघर्ष समिति द्वारा आयोजित की गई थी। इसकी अध्यक्षता अशोक सिंह बना ने की, जबकि संचालन रामसहाय फौजी ने किया। कार्यक्रम में किसान नेता राकेश टिकैत, पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और विधायक हंसराज मीणा सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।
महापंचायत के दौरान मंच पर पूर्व मंत्री रमेश मीणा, राजेंद्र गुढ़ा और विधायक हंसराज मीणा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए, जिससे हंगामा मच गया। मंच पर अव्यवस्था देखकर राकेश टिकैत ने नाराजगी व्यक्त की। युवा नेता नरेश मीणा ने आंदोलन को ‘करो या मरो’ की रणनीति से आगे बढ़ाने की बात कही।
देर शाम हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति ने कहा कि यदि 1 दिसंबर तक मुख्यमंत्री से डूंगरी बांध परियोजना को रद्द करने पर कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है, तो 10 दिसंबर से व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने सत्ताधारी विधायक और सांसद पर आरोप लगाया कि वे डूंगरी बांध के मुद्दे को सरकार के सामने मजबूती से नहीं रख रहे हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे ऐसे फैसलों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ें, जिनसे लोगों के घर उजड़ सकते हैं।
पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा ने दावा किया कि डूंगरी बांध परियोजना से 88 गांव, लगभग 87 हजार बीघा भूमि प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि दो चरणों में 150 से अधिक गांव विस्थापन की चपेट में आएंगे। परियोजना पर 10,045 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 45% पानी 11 जिलों को दिया जाएगा, जबकि स्थानीय क्षेत्र जल संकट से जूझता रहेगा।
इसी दौरान मंच पर विधायक हंसराज मीणा ने रमेश मीणा और गुढ़ा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 15 वर्षों तक विकास रोककर केवल राजनीति की है। उनके इस बयान से माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया।

