राजकीय जेके कैंसर संस्थान, कानपुर।
राजकीय जेके कैंसर संस्थान पहले से ही बदहाली झेल रहा है। कई बार संस्थान को फिर से नए रंग रूप में लाने के जन प्रतिनिधियों ने दावे किए लेकिन ये सब कागजों तक ही सीमित रहा हैं। प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद यहां की ये स्थिति है।
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50 करोड़ की करी थी मांग
गोविंद नगर विधानसभा के विधायक सुरेंद्र मैथानी ने समाचार पत्रों में अस्पताल की बदहाली की खबर छपने के बाद मामले को संज्ञान में लिया था। इसके बाद उन्होंने पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया और फिर सरकार से 50 करोड़ रुपए की मांग की थी, ताकि अस्पताल का संचालन ठीक से हो सके, लेकिन इसके एवज में संस्थान को सिर्फ एक करोड़ रुपए ही मिले है।
प्रदेश के कई जिलों से आते हैं मरीज रावतपुर स्थित जेके कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में कानपुर के अलावा प्रदेश के करीब 18 जिलों से मरीज यहां पर इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें मिलती सिर्फ निराशा ही हैं। शासन की अनदेखी की वजह से यहां की ओपीडी में मरीज की संख्या भी धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।
अब तो सिर्फ 200 के करीब ही मरीज ओपीडी में आते हैं। उनमें भी अधिकांश मरीजों को रेफर ही किया जाता हैं। क्योंकि वर्तमान समय में अस्पताल में जरूरी जांचें तक नहीं हो रही है।
एक्सरे तक की नहीं सुविधा
यहां पर एक्सरे और एमआरआई तक की सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही है। इसकी मुख्य वजह है संस्थान को शासन से बजट न मिलना। इसके कारण मरीजों को यहां पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा ब्लड संबंधित जरूरी जांचें भी नहीं हो रही है, ऐसे में मरीजों को जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल या निजी लैब जाना पड़ रहा है।

