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कोई फिल्म इतनी रियलिस्टिक होती है कि रील और रियल का फर्क ही खत्म हो जाता है. इन फिल्मों को लेकर इतनी दीवानगी होती है कि 50 बार-बार भी देखने के बाद भी मन नहीं भरता. गैंगस्टर की रियल लाइफ पर बेस्ड ऐसी ही एक फिल्म 2000 के शुरुआती दशक में सिनेमाघरों में आई थी. उत्तर भारत में हर आयु वर्ग की पसंदीदा फिल्म बन गई. 25 साल बाद भी यह फिल्म नई जैसी लगती है.
कई फ्लॉप फिल्मों की स्टोरी इतनी रियलिस्टिक होती है कि इन्हें देखते समय जरा भी अहसास नहीं होता कि पर्दे पर मूवी चल रही है. ऐसा लगता है कि जैसे सच में हमारे आसपास की कहानी दिखाई जा रही है. 2005 में सिनेमाघरों में कबीर कौशिक के निर्देशन में बनी एक फिल्म आई थी जिसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड और एमपी में खूब पसंद किया गया. अरशद वारसी-सुशांत सिंह लीड रोल में थे. यह अरशद वारसी के करियर की सबसे बेस्ट फिल्म है. हम बात कर रहे हैं ‘सहर’ फिल्म की.

सहर फिल्म रियलिस्टिक सिनेमा का अनुपम उदाहरण है. अरशद वारसी-सुशांत सिंह के अलावा फिल्म में पंकज कपूर, महिमा चौधरी, राजेंद्र गुप्ता जैसे दिग्गज एक्टर्स ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. अरशद वारसी ने लखनऊ के तत्कालीन एसएसपी अरुण कुमार का रोल निभाया था. कबीर कौशिक ने ही कहानी-स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखे थे. फिल्म उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया और राजनीतिक गठजोड़ को दिखाती है.

‘सहर’ फिल्म की कहानी यूपी के कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला की लाइफ पर बेस्ड थी. फिल्म में उसके कैरेक्टर का नाम गजराज सिंह था. बाकी किरदार काफी मिलते-जुलते थे. फिल्म में गोरखपुर जिले की चिल्लूपार विधानसभा सीट का जिक्र था जहां से कभी बाहुबली विधायक हरिशंकर तिवारी चुनाव लड़ा करते थे. तिवारी इस सीट से लगातार 5 बार विधायक और मंत्री रहे. श्रीप्रकाश उनके ही इलाके (मामखोर गांव) का रहने वाला था. श्रीप्रकाश शुक्ला इसी सीट से चुनाव लड़ना चाहता था.
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90 के दशक में यूपी के गोरखपुर शहर के दुर्दांत गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला का पूरे प्रदेश में आतंक था. गोरखपुर के मामखोर गांव का रहने वाला श्रीप्रकाश शुक्ला अशोक सिंह के नाम से फिरौती मांगा करता था. बिहार के सूरज भान सिंह गिरोह से जुड़ा था. उसके पिता ए ग्रेड के ठेकेदार थे, टीचर नहीं थे. बचपन से ही उसे गैंगस्टर लाइफ का चस्का था, इसीलिए क्राइम की दुनिया में आया. सितंबर 1998 में यूपी एसटीएफ ने उसका गाजियाबाद इंदिरापुरम में एनकाउंटर किया था. यह भी दिलचस्प है कि श्री प्रकाश शुक्ला की पहली तस्वीर बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी की फोटो का सहारा लेकर बनाई गई थी.

कहा जाता है कि श्री प्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह की सुपारी ली थी. श्री प्रकाश शुक्ला के खात्मे के लिए यूपी एसटीएफ बनाई गई थी. फिल्म में पूरी कहानी दिखाई गई है. डायरेक्टर कबीर कौशिक ने पूरी रिसर्च के साथ फिल्म बनाई थी. फिल्म जब 2005 में रिलीज हुई तब मुंबई में बाढ़ आ गई थी. ऐसे में लोग इस फिल्म को देखने सिनेमाघरों में नहीं जा सके.

फिल्म में गजराज सिंह (श्री प्रकाश शुक्ला की लाइफ पर बेस्ड) का किरदार निभाने वाले एक्टर सुशांत सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो उत्तर भारत में जहां भी जाते हैं, उन्हें ऐसा कोई शख्स नहीं मिला जिसने ‘सहर’ फिल्म ना देखी हो. सुशांत सिंह ने कहा था, ‘मेरे फैंस कहते हैं कि वो जो फिल्म आप किए थे, 25 बार देखी है सर, बहुत कमाल की फिल्म है. आज भी इस फिल्म को देखेंगे तो तकनीकी रूप से उसमें पावरफुल परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा. आपको लगेगा ही नहीं कि यह 20 साल पुरानी फिल्म है. जब डायरेक्टर कबीर कौशिक ने कास्टिंग बताई थी तो मुझे लगा कि अरशद वारसी आईपीएस का रोल कर रहे हैं. मुझे लगा कि वो रोल सही ढंग से नहीं कर पाएंगे लेकिन जब मैंने फिल्म देखी तो अरशद की एक्टिंग देखकर होश उड़ गए. अरशद ने जिस तरह से रोल किया, फिल्म रियलिस्टिक हो गई.’

फिल्म इतनी रियलिस्टिक थी कि थिएटर से निकलने के बाद दर्शकों के दिमाग में किरदार कई दिनों तक घूमते रहे. फिल्म को सबसे ज्यादा हिंदी बेल्ट में देखा गया. फिल्म फ्लॉप रही लेकिन यूट्यूब पर इसे करोड़ों व्यूज मिले. अरशद वारसी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘सहर मेरी सबसे पसंदीदा फिल्मों में से एक है. इस फिल्म में एक खास किस्म का रियलिज्म और गहराई है.’

आगे चलकर श्री प्रकाश शुक्ला पर ज़ी 5 की ओर से एक ‘रंगबाज’ नाम से एक वेब सीरीज बनाई गई. इस वेब सीरीज को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया. ‘सहर’ जैसी फिल्में कभी कभार ही बनती है. 4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 2.4 करोड़ का बिजनेस किया.

फिल्म फ्लॉप हो गई लेकिन आज इसकी गिनती कल्ट मूवी में होती है. इस मूवी की एक खास फैन फॉलोइंग है. बार-बार देखकर भी इस मूवी से दिल नहीं भरता. फिल्म लोगों के दिल में हमेशा के लिए बस गई. यह बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी फिल्मों में से है जो रियल सिनेमा को दिखाती हैं.

