शहर के एक नंबर रोड स्थित हांडी शाह दरगाह के पास वक्फ बोर्ड की जमीन से अतिक्रमण हटाने का मामला तूल पकड़ गया है। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने इस कार्रवाई को गरीबों पर जुल्म और भ्रष्टाचार का खेल बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा रात साढ़े 8 -9 बजे अपने समर्थकों के साथ हांडी शाह दरगाह के पास पहुंचे। मौके पर उस समय भारी तनाव फैल गया जब गुढ़ा और कोतवाली थानाधिकारी के बीच सीधी भिड़ंत हुई और पूर्व मंत्री ने गधा-गाड़ी पर चढ़कर प्रशासन और वक्फ बोर्ड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर बनाई गई दीवार को भी तोड़ दिया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे का विवाद और भ्रष्टाचार के आरोप
दरअसल, हांडी शाह दरगाह के पास वक्फ बोर्ड की जमीन पर पिछले कई दशकों से गरीब परिवार छोटी-छोटी दुकानें और थड़ियां लगाकर अपनी आजीविका चला रहे थे। हाल ही में राजस्व रिकॉर्ड और अदालती आदेशों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने इन दुकानों को हटाकर वहां दीवार खड़ी कर दी थी। राजेंद्र गुढ़ा का आरोप है कि इस कार्रवाई की आड़ में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने दुकानदारों से वापस बसने के नाम पर 5-5 लाख रुपये की मांग की। गुढ़ा ने सीधा आरोप जड़ा कि जिन लोगों ने पैसे दे दिए उनकी दुकानें सुरक्षित छोड़ दी गईं, जबकि गरीब और लाचार लोगों के आशियाने उजाड़ दिए गए।
CI और गुढ़ा में हुई सीधी भिड़ंत घटनास्थल पर माहौल तब गर्म हो गया जब पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और कोतवाली थानाधिकारी (CI) श्रवण कुमार आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच तीखी बहस हुई। गुढ़ा ने पुलिस प्रशासन को “गुंडाराज” चलाने वाला बताया और आवेश में आकर थानाधिकारी से कहा, “CI तेरी कब्र खुदेगी।” थानाधिकारी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए गुढ़ा के आरोपों को खारिज किया और सार्वजनिक रूप से कहा कि आपके शासन में आपने मुझे 5 लाख का ऑफर दिया था, जो मैंने ठुकरा दिया था।
गधा-गाड़ी पर प्रदर्शन और दीवार ढहाने की कोशिश विरोध को अनोखा रूप देने के लिए राजेंद्र गुढ़ा गधा-गाड़ी पर सवार हो गए और सैकड़ों समर्थकों के साथ नारेबाजी करते हुए सड़क पर निकल पड़े। इस दौरान उत्तेजित भीड़ ने प्रशासन द्वारा बनाई गई दीवार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। लोगों की बड़ी भीड़ के कारण ट्रैफिक जाम हो गया और पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। RAC के जवानों और कई थानों की पुलिस को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
नहीं चलेगा भेदभाव राजेंद्र गुढ़ा ने इस पूरी कार्रवाई को सांप्रदायिक रंग और भेदभाव से प्रेरित बताया। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि क्या टोपियों और दाढ़ी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है? उन्होंने कहा कि पंचर बनाने वाले और ताले ठीक करने वाले गरीबों को उजाड़कर प्रशासन ने अपनी संवेदनहीनता दिखाई है। आगामी आंदोलन की चेतावनी देर शाम डीएसपी गोपाल ढाका की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ और गुढ़ा मौके से रवाना हुए, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने घोषणा की है कि इन गरीबों को उसी स्थान पर वापस स्थापित किया जाएगा।
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