जबलपुर में डुमना एयरपोर्ट के समीप स्थित गधेरी गांव में मकान निर्माण के दौरान मिले जिंदा बम को सेना की टीम ने रविवार को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिया। बम मिलने से लेकर उसे निष्क्रिय करने तक की पूरी प्रक्रिया करीब 7 से 8 घंटे में पूरी कर ली गई। इसक
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गांव में बम मिलने की सूचना पुलिस और फिर सेना के अधिकारियों को दी गई। बम काफी पुराना था, लेकिन सक्रिय अवस्था में था, इसलिए उसे ज्यादा देर नहीं रखा जा सकता है। उससे खतरा हो सकता था। यह देखते हुए एसपी संपत उपाध्याय ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को प्रतिवेदन भेजा, जिसके आधार पर कलेक्टर ने रक्षा मंत्रालय को मेल किया और जल्द से जल्द बम को डिफ्यूज करने को कहा।
बम को डिफ्यूज करता सेना का जवान।
कलेक्टर के प्रतिवेदन पर केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय ने प्रक्रिया को तेज करते हुए आवश्यक अनुमति दी और सेंट्रल ऑर्डिनेंस डिपो (सीओडी) तथा सेना के अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद रविवार को सेना और सीओडी की टीम ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बम को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जमीन में दबाया और नियंत्रित तरीके से डिफ्यूज कर दिया। समय रहते बम की पहचान और प्रशासन, पुलिस तथा सेना के बीच त्वरित समन्वय के चलते एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।

मौके पर मौजूद बम स्क्वार्ड की टीम।
पिलर के लिए गड्ढा खोदते हुए मिला था बम
जानकारी के अनुसार गधेरी गांव निवासी सुनील यादव के प्लॉट पर भवन निर्माण कार्य चल रहा था। शुक्रवार शाम पिलर के लिए गड्ढे की खुदाई के दौरान जमीन से करीब 3 से 4 फीट नीचे मजदूरों को एक संदिग्ध धातु की वस्तु दिखाई दी। पहले इसे लोहे का कबाड़ समझा गया, लेकिन करीब से देखने पर इसकी आकृति बम जैसी नजर आई। इसके बाद निर्माण कार्य तत्काल रोक दिया गया और पुलिस को सूचना दी गई।

जमीन से निकले बम के साथ सेना और पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी।
50 मीटर थी मारक क्षमता
सूचना मिलते ही सीएसपी सतीश साहू, खमरिया थाना पुलिस और बम निरोधक दस्ते की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पुष्टि हुई कि यह एक जिंदा यूएक्सओ (Unexploded Ordnance) बम है। बम का वजन करीब 12 से 15 किलो बताया गया, जबकि इसकी मारक क्षमता लगभग 50 मीटर तक आंकी गई। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के लोगों को तत्काल वहां से हटा दिया गया।
पुलिस ने मामले की जानकारी सेना के अधिकारियों को दी और बम को उनके सुपुर्द कर दिया। बताया गया कि जहां बम मिला, वह स्थान आयुध निर्माणी खमरिया से करीब छह किलोमीटर दूर है। बम को अधिक समय तक सुरक्षित रखना जोखिमपूर्ण था, इसलिए प्रशासन ने इसे जल्द से जल्द निष्क्रिय कराने की प्रक्रिया शुरू की।
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