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मंडे यानी सोमवार… एक ऐसा दिन जिसे भारत में भगवान शिव और चंद्रदेव से जोड़ा जाता है, जबकि पश्चिमी दुनिया में इसका रिश्ता रोमन देवी लूना से रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोमवार या मंडे शब्द की शुरुआत कहां से हुई? आइए जानें, अंग्रेजी के मंडे के नाम के पीछे छिपी पूरी ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कहानी.
सोमवार सप्ताह का पहला दिन है या दूसरा, कहां से आया यह नाम, रोमन देवी से क्या है इसका कनेक्शन, बड़ी रोचक है पूरी कहानी.
Monday Ka Itihas: मंडे यानी सोमवार… भारत में यह दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है. दूसरी तरफ यूरोप की बात करें, तो वहां कभी इस दिन को रोमन देवी ‘लूना’ से जोड़कर देखा जाता है. यूरोप में देवी लूना का मान्यता चंद्र देवी की है. वहीं आज की GenZ पीढ़ी की बात करें तो उनके लिए सोमवार का दिन ‘मंडे ब्लूज (Monday Blues)’ है. मंडे ब्लूज यानी जेंजीज का वह मनहूस दिन, जिस दिन उनकी वीकेंड की मस्ती खत्म हो गई है और काम का बोझ उनका इंतजार कर रहा है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस एक दिन को लेकर पूरी दुनिया की सोच इतनी अलग होने के बावजूद उसका आधार एक जैसा क्यों है? धर्म अलग, भाषा अलग, परंपराएं अलग… लेकिन मंडे का रिश्ता लगभग हर जगह चंद्रमा से ही जुड़ा हुआ है. भारत में यह ‘सोमवार’ कैसे बना और अंग्रेजी में ‘मंडे’ नाम कहां से आया? क्या यह नाम हमेशा से ऐसा ही था या समय के साथ बदलता गया? दिलचस्प बात यह है कि इस दिन की कहानी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित नहीं है.
इसके पीछे हजारों साल पुराना इतिहास छिपा है. कभी बेबीलोन के खगोलविदों ने ग्रहों और चंद्रमा के हिसाब से दिनों के नाम तय किए थे. फिर रोमन साम्राज्य ने इसे अपनी देवी ‘लूना’ से जोड़ दिया. बाद में जर्मनिक सभ्यताओं ने अपने हिसाब से इसका नाम बदला और धीरे-धीरे ‘मोनांडेग (Monandæg)’ से यह ‘Monday’ बन गया. वहीं भारत में यह दिन सदियों से ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता रहा. आइए अब जानते हैं कि आखिर ‘Monday’ नाम की शुरुआत कैसे हुई और क्यों पूरी दुनिया में इसका रिश्ता चंद्रमा से जुड़ गया.
सोमवार यानी मंडे से जुड़ी 5 खास बातें आपको कर देंगी हैरान
- बेबीलोन से आए ये सात दिन: सात दिनों के सप्ताह की अवधारणा सबसे पहले मेसोपोटामिया में बेबीलोनियन खगोलविदों ने विकसित की थी. लगभग 600 ईसा पूर्व में उन्होंने सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि नामक सात ग्रहों के नाम पर सात दिनों के नाम रखे थे. यह पद्धति इतनी वैज्ञानिक थी कि बाद में रोमन और यूनानियों ने इसे अपना लिया और अपने देवताओं से जोड़ दिया. इसमें चंद्रमा को सबसे पहले स्थान में रखा गया, लिहाजा सप्ताह के पहले दिन का नाम सोमवार यानी मंडे हुआ.
- रोमन देवी लूना का दिन: जब रोमन साम्राज्य ने सात दिनों वाले सप्ताह की व्यवस्था को अपनाया, तब उन्होंने सोमवार को अपनी चंद्र देवी ‘लूना’ को समर्पित कर दिया. रोमन मान्यता के अनुसार, लूना रात, शांति और चंद्रमा की शक्ति का प्रतीक थीं. लैटिन भाषा में इस दिन को ‘डाइस लूने (Dies Lunae)’ कहा गया, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘चंद्रमा का दिन’. माना जाता है कि इसी नाम से आगे चलकर अंग्रेजी का शब्द ‘Monday’ बना. रोमन सभ्यता में चंद्रमा को भावनाओं, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता था, इसलिए सोमवार को एक नई शुरुआत के दिन के रूप में भी देखा जाता था.
- 321 ईस्वी में कानून तौर पर तय हुआ मंडे नाम: 7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने पूरे रोमन साम्राज्य में सात दिनों का सप्ताह अनिवार्य कर दिया. साथ ही, यह तय किया कि रविवार सप्ताह का पहला दिन होगा, जबकि मंडे उसका दूसरा दिन. यह वह दौर था जब ‘डाइस लूने’ को आधिकारिक मान्यता मिली और बाद में पूरी पश्चिमी दुनिया का कैलेंडर इसी के अनुसार ढल गया.
- जर्मनिक देवता ‘मणि’ और ‘मोनांडेग’ का कनेक्शन: जब रोमन साम्राज्य का पतन हुआ और जर्मनिक जनजातियों (एंग्लो-सैक्सन) ने ब्रिटेन पर कब्जा किया, तो उन्होंने रोमन कैलेंडर को तो अपना लिया, लेकिन देवताओं को बदल दिया. रोमन लूना की जगह उनके अपने चंद्र देवता ‘मणि’ (Māni) आ गए. इस तरह लैटिन ‘Dies Lunae’ का अनुवाद पुरानी अंग्रेजी में ‘मोनांडेग (Monandæg)’ हुआ, जो आज का ‘मंडे’ है.
- भारत में चंद्र देवता और शिव का मिलन: जहां पश्चिम में यह नाम बदलता रहा, वहीं प्राचीन भारत में यह दिन हमेशा ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता था. ‘सोम’ का अर्थ चंद्र देवता से है. हिंदू धर्म में यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, क्योंकि उनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है. हजारों साल पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. साथ ही, यह साबित करती है कि भारत में दिनों का नामकरण खगोल विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत मिश्रण था.
सोमवार के नाम और प्रभाव से जुडे़ कुछ रोचक पहलू
- जापान से लेकर जर्मनी तक चंद्रमा है केंद्र: क्या आपने कभी सोचा है कि जापानी या कोरियाई भाषा में सोमवार का क्या अर्थ होता है? जापानी में इसे ‘गेत्सुयोबी (Getsuyōbi)’ कहा जाता है, जिसमें ‘गेत्सु (Getsu)’ का मतलब चंद्रमा होता है. वहीं जर्मन भाषा में Monday को ‘मोंटाग (Montag)’ कहा जाता है, जो प्राचीन जर्मनिक चंद्र देवता ‘मानो (Mano)’ के नाम से जुड़ा माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं और संस्कृतियों ने इस दिन को चंद्रमा से जोड़कर देखा. भले ही अलग-अलग देशों में देवताओं के नाम और मान्यताएं अलग रहीं, लेकिन सोमवार और चंद्रमा का रिश्ता लगभग हर सभ्यता में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है.
- पुर्तगाली और अरबी में कहा गया ‘दूसरा दिन’: सभी संस्कृतियों ने मूर्तिपूजक नामों को स्वीकार नहीं किया. ईसाई धर्म के प्रभाव के चलते पुर्तगाली भाषा में सोमवार को ‘सेगुंडा-फेइरा (Segunda-feira)’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा दिन’ यानी रविवार के बाद आने वाला दिन. इसी तरह, अरबी में इसे ‘अल-इथनैन (Al-Ithnayn)’ कहा जाता है, जिसका मतलब भी ‘दूसरा दिन’ ही होता है. यह बदलाव जानबूझकर किया गया था, ताकि प्राचीन मूर्तिपूजक परंपराओं और देवी-देवताओं से जुड़े नामों से दूरी बनाई जा सके. खास तौर पर चंद्र देवी लूना (Luna) जैसी मान्यताओं के प्रभाव को कम करने के लिए कई भाषाओं में दिनों के नाम धार्मिक आधार पर बदले गए.
- मंडे ब्लूज सिर्फ एक मिथक नहीं: आज दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चित शब्दों में से एक है ‘मंडे ब्लूज’. लेकिन क्या यह सिर्फ एक बहाना है? रिसर्च बताती हैं कि सप्ताहांत में अस्त-व्यस्त हुई सर्केडियन रिदम यानी शरीर की जैविक घड़ी के कारण सोमवार सुबह शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर अचानक बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोगों को सोमवार की शुरुआत भारी, थकाऊ और तनावपूर्ण लगती है. विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक और सुसाइड के मामलों में भी मंडे का दिन सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है.
- सप्ताह की शुरुआत को लेकर अंतर्राष्ट्रीय विवाद: हैरानी की बात है कि दुनिया इस बात पर आज भी पूरी तरह सहमत नहीं है कि सोमवार सप्ताह का पहला दिन है या दूसरा. अमेरिका और कनाडा में कैलेंडर रविवार यानी संडे से शुरू होता है, जबकि आईएसओ 8601 यानी अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन के अनुसार सोमवार को सप्ताह का पहला दिन माना जाता है. यूरोप, चीन और रूस जैसे कई देशों में भी सप्ताह की शुरुआत सोमवार से ही होती है. वहीं भारत में हिंदू कैलेंडर दोनों परंपराओं को मान्यता देता है, इसलिए यहां अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं.
क्या इस दिन का नाम हमेशा ‘चंद्रमा’ से जुड़ा रहा है?
हां, प्राचीन सुमेरियन और बेबीलोनियन सभ्यता से लेकर रोमन, ग्रीक, जर्मनिक और भारतीय सभ्यता तक सभी ने इस दिन को किसी न किसी रूप में चंद्रमा से जोड़ा. यह खगोलीय घटना इतनी स्पष्ट थी कि कोई भी सभ्यता इसे नजरअंदाज नहीं कर पाई. हालांकि, ईसाई और इस्लामिक परंपराओं में संख्याओं के आधार पर नामकरण करके इससे थोड़ी दूरी बनाई गई, लेकिन जनमानस में चंद्रमा का संबंध आज भी मजबूती से बना हुआ है.
भारत और पश्चिमी देशों में सोमवार के नामकरण में मूल अंतर क्या है?
भारत में नामकरण पूरी तरह से ज्योतिष और वेदों पर आधारित था, जहां ‘सोम’ (चंद्रमा) को एक देवता का दर्जा दिया गया. पश्चिम में, यही प्रक्रिया रोमन और यूनानी देवताओं के माध्यम से हुई. एक बड़ा अंतर यह है कि भारत में सोमवार को भगवान शिव से जोड़कर व्रत और उपासना की परंपरा बनी, जबकि पश्चिम में इस दिन को केवल एक खगोलीय नाम दिया गया और बाद में ईसाई चर्च ने इसे ‘दूसरा दिन’ कहकर संख्यात्मक पहचान देने की कोशिश की.
क्या ‘मंडे ब्लूज’ एक मेडिकल कंडीशन है?
मंडे ब्लूज को आधिकारिक तौर पर किसी मेडिकल डिक्शनरी में मानसिक बीमारी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है. हालांकि, यह एक मान्यता प्राप्त सामाजिक और व्यवहारिक घटना है. कई अध्ययनों में पाया गया है कि सोमवार को रक्तचाप और तनाव का स्तर सबसे अधिक होता है. फिनलैंड में हुए एक शोध के अनुसार, रविवार और सोमवार के मुकाबले बुधवार को दिल के दौरे की संभावना 20% कम होती है. इसलिए, इसे पूरी तरह से नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.
आखिर 321 ईस्वी का फैसला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने जो कानून पारित किया, उसने पूरी पश्चिमी दुनिया के कैलेंडर को एक सांचे में ढाल दिया. इससे पहले, कई क्षेत्रों में आठ दिनों या दस दिनों के सप्ताह भी चलते थे. कॉन्सटेंटाइन के इस फैसले ने यह सुनिश्चित किया कि सोमवार को एक निश्चित स्थान मिले और ईसाई दुनिया में रविवार को आराम का दिन घोषित कर दिया गया. यही वह आधार है जिस पर आज हमारा आधुनिक कैलेंडर टिका है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

