3 घंटे पहले
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कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में क्रिकेट कनाडा के नए प्रेसिडेंट अरविंदर खोसा के घर पर बुधवार सुबह फायरिंग की गई। अरविंदर खोसा ने CBC न्यूज से पुष्टि की कि उनके घर को निशाना बनाया गया, हालांकि उन्होंने घटना पर ज्यादा जानकारी नहीं दी।
रिपोर्ट के मुताबिक घर के दरवाजे, खिड़कियों और बाहरी हिस्से में कम से कम पांच गोलियों के निशान मिले हैं। पुलिस ने बताया कि सुबह करीब 4:40 बजे उन्हें घटना की सूचना मिली थी और उस समय घर के अंदर लोग मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, घर से जुड़े एक व्यक्ति को पहले रंगदारी से जुड़ी धमकियां भी मिल चुकी थीं। CBC की एक पुरानी जांच रिपोर्ट में अरविंदर खोसा का नाम बिश्नोई गैंग से जोड़ा गया था, हालांकि खोसा ने इन आरोपों से इनकार किया था।
हाल ही में CBC ने क्रिकेट कनाडा में भ्रष्टाचार, संगठित अपराध के प्रभाव और मैच फिक्सिंग की कोशिशों को लेकर भी कई आरोपों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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इबोला संकट के बीच भारत-अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन टला: नई दिल्ली में 28 मई से होना था आयोजन

अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला वायरस के मामलों के बीच भारत और अफ्रीकी संघ ने नई दिल्ली में होने वाला इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट स्थगित कर दिया है। यह सम्मेलन 28 मई से आयोजित होना था।
भारत सरकार ने बयान जारी कर कहा कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में “बदलती स्वास्थ्य स्थिति” को देखते हुए सम्मेलन को फिलहाल टालने का फैसला लिया गया है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के साउथ किवु प्रांत समेत अफ्रीका के कई इलाकों में इबोला वायरस के मामले सामने आए हैं।
भारत और अफ्रीकी संघ चौथे इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट की तैयारियों में जुटे थे। हालांकि हालात की समीक्षा के बाद दोनों पक्षों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। सरकार ने कहा कि सम्मेलन की नई तारीख आपसी परामर्श के बाद तय की जाएगी।
यह फैसला भारत और अफ्रीकी संघ आयोग के चेयरपर्सन के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि मौजूदा परिस्थितियों में सम्मेलन बाद में आयोजित करना उचित रहेगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। हालांकि भारत में अब तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने देशभर में निगरानी और तैयारी बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्री-अराइवल और पोस्ट-अराइवल स्क्रीनिंग, क्वारंटीन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल मैकेनिज्म और लैब टेस्टिंग से जुड़े SOP लागू रखने को कहा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्वास्थ्य संकट के पीछे इबोला का ‘बुंडीबुग्यो’ वेरिएंट जिम्मेदार है। विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला के अलग-अलग वेरिएंट्स की घातकता और फैलने की क्षमता अलग होती है। 2014-16 में पश्चिम अफ्रीका में फैली महामारी ‘जायरे’ स्ट्रेन की वजह से हुई थी।
UN में भारत बोला- नरसंहार का इतिहास रखने वाला पाकिस्तान कश्मीर पर भाषण दे रहा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर मुद्दा उठाने पर भारत ने कहा कि नरसंहार का इतिहास रखने वाला देश भारत के आंतरिक मामलों पर भाषण दे रहा है।
बुधवार को UNSC में सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान पर कड़ा पलटवार किया।
पर्वथनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड दिखाता है कि वह अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा और आक्रामकता का सहारा लेता रहा है।
भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। पर्वथनेनी ने कहा कि इस साल रमजान के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर बर्बर हवाई हमला किया था।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन UNAMA का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 लोग घायल हुए थे। भारत ने कहा कि यह हमला ऐसे अस्पताल पर हुआ, जिसे किसी भी तरह सैन्य ठिकाना नहीं कहा जा सकता।
पर्वथनेनी ने पाकिस्तान पर अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि UNAMA के मुताबिक, पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।
भारत ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी जिक्र किया। पर्वथनेनी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने उस दौरान 4 लाख महिलाओं के खिलाफ संगठित सामूहिक दुष्कर्म अभियान चलाया था।
ब्रिटिश रेडियो स्टेशन ने गलती से किंग चार्ल्स की मौत की घोषणा की, बाद में मांगी माफी

ब्रिटेन के रेडियो स्टेशन ‘रेडियो कैरोलाइन’ ने तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से किंग चार्ल्स III की मौत की घोषणा कर दी। बाद में स्टेशन ने प्रसारण बहाल करते हुए किंग और श्रोताओं से माफी मांगी।
रेडियो कैरोलाइन के स्टेशन मैनेजर पीटर मूर ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मुख्य स्टूडियो में कंप्यूटर एरर के कारण “डेथ ऑफ अ मॉनार्क” प्रक्रिया गलती से एक्टिवेट हो गई। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ब्रिटेन के सभी रेडियो स्टेशनों में आपात स्थिति के लिए तैयार रखी जाती है।
गलत घोषणा के बाद रेडियो स्टेशन कुछ समय के लिए बंद हो गया। इसी से टीम को तकनीकी गड़बड़ी का पता चला, जिसके बाद सामान्य प्रसारण बहाल किया गया और ऑन-एयर माफी जारी की गई।
पीटर मूर ने कहा, “हम किंग और अपने श्रोताओं से हुई परेशानी के लिए माफी मांगते हैं।”
1964 में शुरू हुआ रेडियो कैरोलाइन ब्रिटेन के अलावा बेल्जियम और नीदरलैंड्स समेत कई देशों में प्रसारण करता है। स्टेशन ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
गलत घोषणा वाले दिन किंग चार्ल्स III और क्वीन कैमिला उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट दौरे पर थे। बकिंघम पैलेस के मुताबिक, दोनों ने थॉम्पसन डॉक में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
किंग चार्ल्स ने फरवरी 2024 में बताया था कि उन्हें कैंसर है। हालांकि दिसंबर में जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि इलाज का असर सकारात्मक है और इस साल उनका उपचार कम किया जाएगा।
अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या का केस किया; 1996 में दो विमान गिराने का आरोप

अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर 1996 में दो विमानों को मार गिराने और चार लोगों की हत्या का केस दर्ज किया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों की हत्या के मामले में की गई है।
बुधवार को मियामी में कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने राउल कास्त्रो और पांच अन्य लोगों के खिलाफ आरोपों की घोषणा की।
केस में कहा गया है कि 1996 में क्यूबा और फ्लोरिडा के बीच ब्रदर्स टू द रेस्क्यू समूह के दो विमानों को गिराया गया था। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी, जिनमें तीन अमेरिकी नागरिक शामिल थे।
उस समय राउल कास्त्रो क्यूबा की सेना के प्रमुख थे। अमेरिका ने उन पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश, विमान नष्ट करने और चार हत्या के आरोप लगाए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हत्या के आरोपों में मौत की सजा या उम्रकैद तक हो सकती है। टॉड ब्लांश ने कहा, “अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रम्प अपने नागरिकों को नहीं भूलेंगे।”
वहीं क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश है। डियाज-कैनेल ने दावा किया कि क्यूबा ने उस समय आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका लगातार क्यूबा पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिका ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगाए और तेल आपूर्ति पर भी दबाव बनाया, जिससे वहां बिजली संकट और खाद्य कमी जैसी समस्याएं बढ़ीं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हाल ही में क्यूबा की सैन्य संचालित कंपनी GAESA को देश के संकट के लिए जिम्मेदार बताया था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 94 वर्षीय राउल कास्त्रो के अमेरिका आकर अदालत में पेश होने की संभावना बेहद कम है।
अमेरिका ने UN विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज़ पर लगे प्रतिबंध हटाए

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज़ को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची से हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर 20 मई को यह जानकारी सामने आई। यह फैसला उस फेडरल कोर्ट आदेश के एक हफ्ते बाद आया है, जिसमें ट्रम्प प्रशासन के प्रतिबंधों पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।
फ्रांसेस्का अल्बानीज़ इटली की वकील हैं और संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर विशेष रैपोर्टेयर हैं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) से इजरायली और अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों की जांच और मुकदमे की सिफारिश की थी। उन्होंने एक रिपोर्ट में कई अमेरिकी कंपनियों पर गाजा में इजरायल के “जारी नरसंहार अभियान” में सहयोग करने का आरोप भी लगाया था।
अमेरिका ने जुलाई 2025 में अल्बानीज़ पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि वह ICC को अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों, कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उकसा रही थीं। इन प्रतिबंधों के तहत उनके अमेरिका में प्रवेश और बैंकिंग सेवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
इसके बाद अल्बानीज़ के पति और उनकी अमेरिकी नागरिक बेटी ने फरवरी में ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। वॉशिंगटन के अमेरिकी जिला जज रिचर्ड लियोन ने 13 मई को कहा कि अल्बानीज़ के अमेरिका से बाहर रहने के बावजूद उन्हें अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण मिलता है। जज ने कहा कि प्रशासन ने उनके “विचार और संदेश” को नियंत्रित करने की कोशिश की।
कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने कहा था कि आदेश प्रभावी रहने तक प्रतिबंध लागू नहीं किए जाएंगे। अब अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की वेबसाइट से उनका नाम भी हटा दिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इबोला वैक्सीन आने में लग सकते हैं 9 महीने: WHO बोला- 600 संदिग्ध केस, 139 मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि बुंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं। संगठन के मुताबिक DR कांगो और युगांडा में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और अब तक 600 संदिग्ध मामले तथा 139 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि DR कांगो में 51 मामलों की पुष्टि हुई है। संक्रमण का सबसे ज्यादा असर पूर्वी इतुरी प्रांत और नॉर्थ किवु में देखा गया है। पड़ोसी देश युगांडा की राजधानी कंपाला में भी 2 संक्रमित मिले हैं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है।
WHO ने रविवार को इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था, लेकिन कहा कि स्थिति अभी महामारी स्तर तक नहीं पहुंची है। टेड्रोस ने कहा कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम बहुत ज्यादा है, जबकि वैश्विक स्तर पर खतरा कम माना जा रहा है।
WHO के मुताबिक मृतकों में स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भारी दबाव है। कई स्वास्थ्यकर्मी पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना काम कर रहे हैं। मेडिसिन्स सैंस फ्रंटियर्स (MSF) की इमरजेंसी प्रोग्राम मैनेजर ट्रिश न्यूपोर्ट ने कहा कि कई अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों के लिए जगह कम पड़ रही है।
WHO सलाहकार डॉ. वासी मूर्ति ने बताया कि बुंडीबुग्यो प्रजाति के खिलाफ दो संभावित वैक्सीन विकसित की जा रही हैं, लेकिन अभी किसी का क्लिनिकल ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एक वैक्सीन को तैयार होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं। दूसरी वैक्सीन AstraZeneca के कोविड वैक्सीन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, लेकिन उसकी प्रभावशीलता को लेकर अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
WHO के अनुसार पहला ज्ञात मामला एक नर्स का था, जिसमें 24 अप्रैल को लक्षण दिखे थे और बाद में उसकी मौत हो गई। शुरुआती लक्षण मलेरिया और टायफाइड जैसे होने की वजह से संक्रमण की पहचान में देरी हुई।
पूर्वी DR कांगो लंबे समय से संघर्ष और हिंसा से प्रभावित इलाका है। WHO का कहना है कि इससे संक्रमण को नियंत्रित करना और मुश्किल हो गया है। ब्रिटेन ने प्रकोप रोकने के लिए 2 करोड़ पाउंड की सहायता देने की घोषणा की है।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज कैरेबियन पहुंचा: क्यूबा पर ट्रम्प के सख्त रुख के बीच बढ़ा तनाव

अमेरिका ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस निमित्ज और उसका स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन सागर में तैनात किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प क्यूबा के खिलाफ लगातार सख्त बयान दे रहे हैं और दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।
अमेरिकी दक्षिणी कमान (Southcom) ने बुधवार को इस तैनाती की घोषणा की। अमेरिकी दक्षिणी कमान कैरेबियन और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी करता है।
1975 में अमेरिकी नौसेना में शामिल हुआ यूएसएस निमित्ज हाल ही में ब्राजील की नौसेना के साथ रियो डी जेनेरियो तट के पास संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार “क्यूबा को लेकर गंभीरता से सोच रही है।” यह बयान अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा पूर्व क्यूबाई राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर 1996 में दो नागरिक विमानों को गिराने के मामले में हत्या समेत कई आरोप तय किए जाने के बाद आया। उस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो क्यूबाई मूल के हैं, ने स्पेनिश भाषा में क्यूबा की जनता को संदेश जारी किया। उन्होंने अमेरिका की ईंधन नाकेबंदी का समर्थन किया और बार-बार हो रही बिजली कटौती के लिए क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट के मुताबिक CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने पिछले हफ्ते क्यूबा अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत का मौका हमेशा खुला नहीं रहेगा। कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने के बाद अमेरिका-क्यूबा तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


