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Same Tune songs in 5 Bollywood Movies : रेडियो-टीवी पर जैसे ही कोई मनपसंद गाना आता दिल धड़कने लगता है. गाना के बोल के साथ-साथ फिल्म, उसकी स्टोरी भी दिमाग में घूमने लगती है. ब्लॉकबस्टर सॉन्ग चाहे किसी भी समय के हो, हमेशा कर्णप्रिय लगते हैं. वैसे तो हर गाने की धुन अलग होती है. अर फिल्म का म्यूजिक अलग होता है. फिर भी कई बार हमें एक ही धुन कई फिल्मों में सुनने को मिल जाती है. बॉलीवुड की एक मेलोडियस ट्यून तो पांच फिल्मों में सुनाई दी. चौंकाने वाली बात तो यह है कि पांच गानों में से दो को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.
म्यूजिक के बिना बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना ही नहीं की जा सकती. म्यूजिक किसी भी फिल्म का आधार है. फिल्म की कहानी के हिसाब से लिखे गए कर्णप्रिय गाने स्टोरी को आगे बढ़ाते हैं. कई बार सुपरहिट गाने ही फिल्म की पहचान बन जाते हैं. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर म्यूजिक पर हमेशा फोकस करते हैं. जितना ज्यादा म्यूजिक हिट होगा, फिल्म की चर्चा उतनी ही ज्यादा होगी. बॉलीवुड में कई बार एक ही धुन को अलग-अलग फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. सेम ट्यून पर अलग-अलग गाने बनाए गए. एक धुन तो पांच फिल्मों में सुनाई दी.

संगीतकार एसडी बर्मन ने 1951 में ऐसी मेलोडियस ट्यून बनाई जिस पर पांच बार गाने बनाए गए. पांचों गाने अलग-अलग फिल्मों में सुनाई दिए लेकिन धुन एक जैसी थी. ये फिल्में थीं : आपकी परछाइयां, ममता, गरम मसाला, अगर तुम ना होते और सागर. एसडी बर्मन के बेटे आरडी ने इस धुन को सबसे ज्यादा कॉपी किया. कई दूसरे संगीतकारों ने भी इस धुन को चुराया.

एसडी बर्मन साहब ने ‘नौजवान’ फिल्म के लिए एक ट्यून बनाई. गीतकार साहिर लुधियानवी ने इस जो गाना लिखा वो अमर हो गया. गाने के बोल थे : ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं..’. लता मंगेशकर ने इस गाने को आवाज दी थी. डायरेक्शन महेश कौल ने किया था. दिलचस्प बात यह है कि इस धुन में थोड़ा बहुत फेरबदल करके इसे पांच फिल्मों में इस्तेमाल किया गया.
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धर्मेंद्र-शशिकला की एक फिल्म ‘आपकी परछाइयां’ 1964 में रिलीज हुई थी. मोहन कुमार ने डायरेक्शन में बनी इस फिल्म का म्यूजिक मदन मोहन ने कंपोज किया था. मदन मोहन ने भी एसडी बर्मन की उस ट्यून को कॉपी किया. थोड़ा सा हेर-फेर करके धुन बना ली. गाना जो बनकर तैयार हुआ, उसके बोल थे : यही है तमन्ना, तेरे घर के सामने, मेरी जान जाए, मेरी जान जाए….’ मोहम्मद रफी की आवाज में गाना आज भी उतना ही पॉप्युलर है लेकिन सही मायने में देखा जाए तो यह धुन ‘नौजवान’ मूवी से इंस्पायर्ड थी. मजेदार बात यह है कि 1966 में ही संगीतकार रोशन ने इस धुन पर फिल्म ‘ममता’ में एक गाना कंपोज किया. गाने के बोल थे : रहें ना रहें हम, महका करेंगे, बनके कली…’ . असित सेन के डायरेक्शन में बनी धर्मेंद्र-सुचित्रा सेन स्टारर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही थी. इस तरह से धर्मेंद्र की दो फिल्मों में यह गाना सुनाई दिया.

आरडी बर्मन ने तीन बार इसी धुन पर गाने कंपोज किए. तीनों ही गाने खूब पॉप्युलर हुए. पहली बार पंचम दा ने इस धुन पर एक गाना 1981 में आई फिल्म ‘नरम गरम’ के लिए कंपोज किया. स्वरूप संपत-अमोल पालेकर, शत्रुघ्न सिन्हा, उत्पल दत्त स्टारर इस फिल्म का डायरेक्शन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था. इस फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘हमें रास्तों की जरूरत नहीं है…’ 1951 की नौजवान मूवी के कालजयी गाने ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं’ से इंस्पायर्ड था. इस गाने को आशा भोसले ने बहुत ही खूबसूरती से गाया. ‘नरम-गरम’ फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है. आरडी बर्मन ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा करते हुए बताया था कैसे उनके पिता के गाने की धुन को बार-बार कॉपी किया गया.

पंचम दा ने 1983 में राजेश खन्ना-रेखा और राज बब्बर स्टारर फिल्म ‘अगर तुम न होते’ में एक बार फिर से इसी धुन का इस्तेमाल किया. और एक नया गाना कंपोज कर दिया. गाने के बोल थे ‘हमें और जीने के चाहत ना होती, अगर तुम ना होते….’. यह गाना आज भी टूटे दिल आशिकों की पहचान है. मुहब्बत के अहसास को जताने का जरिया है. प्रेमी अक्सर इस गाने को गुनगुनाते मिल जाते है. किशोर कुमार ने इस गाने को अपनी आवाज में अमर कर दिया. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के लिए किशोर कुमार को फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था.

आरडी बर्मन ने 1985 में एक और म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘सागर’ में इसी धुन पर एक सुपरहिट गाना कंपोज किया. डायरेक्टर रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऋषि कपूर, कमल हसन, डिंपल कपाड़िया लीड रोल में नजर आए थे. स्टोरी, गाने, स्क्रीनप्ले जावेद अख्तर ने लिखा था. गाने के बोल थे : सागर किनारे, दिल ये पुकारे… गाना सुपरहिट साबित हुआ. मूवी भी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.

