अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एआई को लेकर बड़ी बात कही है। भारत समेत दुनिया में एआई का प्रभाव बढ़ता रहा है। उन्होंने एआई के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया है। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने CII के एनुअल बिजनेस समिट में बोलते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ बोर्डरूम को ही सशक्त बनाने का काम न करे। इसका इस्तेमाल भारत को भी सशक्त बनाने के लिए भी होना चाहिए।
आम लोगों के काम आए AI
अपने संबोधन के दौराण गौतम अदाणी ने कहा कि भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति को इस पैमाने पर मापना चाहिए कि इससे देश के आम लोगों, वर्कर्स और छोटे बिजनेस को कितना फायदा मिल रहा है। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन नई दिल्ली में आयोजित कन्फिडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के वार्षिक बिजनेस समिट में एआई को लेकर अपनी बात रखी है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत को उन सभी आइडिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर देना चाहिए, जिसमें एआई की वजह से जॉब कट और लोगों की जीविका प्रभावित हो। भारत में एआई को एक ताकत के तौर पर देखा जाना चाहिए, जो प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और छोटे बिजनेस को सशक्त बनाने का काम करे। हर भारतीय इस टूल का इस्तेमाल वैश्विक कम्पीटिशन के लिए करे।
UPI का दिया उदाहरण
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने यूपीआई सिस्टम के ट्रांसफॉर्मेशन का जिक्र करते हुए कहा कि देश की सबसे परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी क्रांतियां तब सफल होती हैं, जब इसकी पहुंच लोगों तक रहे और बड़े पैमाने पर अवसर पैदा करती हैं। UPI ने सिर्फ पैसों की लेन-देन को आसान नहीं बनाया बल्कि इसने छोटे बिजनेस को विजिबल बनाया है, जिसकी वजह से एस नए इकोनॉमिक ईकोसिस्टम पर लोगों का भरोसा बढ़ा है।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो खुद की निर्भरता
गौतम अदाणी ने कहा कि इस अवसर को तभी साकार किया जा सकता है, जब भारत में विश्वसनीय ऊर्जा, डेटा सेंटर, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क, एप्लिकेशन और एआई-इंटिग्रेटेड स्किल ईकोसिस्टम सहित पूर्ण एआई स्टैक का निर्माण हो। उन्होंने ये भी कहा कि इंटेलिजेंस के युग का निर्माण केवल चिप, सर्वर और एल्गोरिदम पर नहीं किया जा सकता है। यह टेक्नीशियन, इलेक्ट्रीशियन, ऑपरेटरों, कूलिंग इंजीनियरों और डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे भौतिक बुनियादी ढांचे का समर्थन करने वाले लाखों कुशल श्रमिकों के माध्यम से भी किया जा सकता है।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने विदेशी डिजिटल ईकोसिस्टम पर निर्भरता को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर शासन कला के उपकरण बन गए हैं। डेटा को राष्ट्रीय संसाधन के रूप में माना जा रहा है। क्लाउड्स को हथियार बनाया जा रहा है। डेटा सेंटरों की सुरक्षात्मक दीवारों के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का निर्माण किया जा रहा है।
डेटा सेंटर में बड़ा निवेश
उन्होंने आगे कहा कि अदाणी ग्रुप ने क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर के लिए 100 बिलियन डॉलर निवेश किया है। इसके अलावा भारत में कम्प्यूट क्षमता को बढ़ाने के लिए गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बहुत लंबे समय से, डिजिटल दुनिया को बिना मानचित्र के स्थानों के रूप में माना जाता रहा है, लेकिन इस खंडित युग में, हमें यह समझना चाहिए कि डेटा का एक घर होता है और बुद्धिमत्ता का एक भूगोल होता है। भारत को अपने इंटेलिजेंस के भविष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्टर रेंट पर नहीं लेना चाहिए। भारत को इसे अपनी धरती पर खुद तैयार करना चाहिए।
दिमागों में लड़ी जाएगी अगली लड़ाई
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि अगली स्वतंत्रता की लड़ाई हमारे ग्रिड्स, डेटा सेंटर, फैक्ट्री, क्लासकूम, लैब्स और हमारे दिमागों में लड़ी जाएगी और इंटेलिजेंस एज में स्वतंत्रता का अर्थ होगा खुद को शक्ति देना, खुद के लिए गणना करने और खुद के लिए सपने देखने की क्षमता।
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