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Iran-US ceasefire: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा होते ही भारत ने वेस्ट एशिया में अपनी कूटनीतिक चाल चल दी है. फ्यूचर में भी किसी तरह ईंधन संकट न हो, इसके लिए अभी से ही गेम प्लान पर काम शुरू हो गया है. यही वजह है कि अब मोदी सरकार के तीन प्रमुख ‘धुरंधर’- विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री एक साथ मैदान में उतर पड़े हैं. इन तीन यात्राओं का मकसद स्पष्ट है ऊर्जा सुरक्षा बहाल करना, सप्लाई चेन सुधारना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना.
ईरान युद्धविराम के बीच भारत की तिकड़ी की ऊर्जा कूटनीति तेज (जयशंकर की फाइल फोटो)
ईरान जंग पर पॉज बटन दब गया है. अमेरिका-ईरान में 15 दिनों का सीजफायर है. ईरान जंग पर युद्धविराम की घोषणा होते ही भारत ने अपना गेम शुरू कर र दिया है. जी हां, पश्चिम एशिया से लेकर अमेरिका तक भारत ने अपनी कूटनीतिक चाल चलनी शुरू कर दी है. ईरान युद्ध सीजफायर के मौके को भारत भुनाना चाहता है. तेल-एलपीजी से लेकर ऊर्जा सप्लाई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने मैदान में अपने तीन धुरंधरों को उतार दिया है. मोदी सरकार ने अपने तीन अहम चेहरों को अलग-अलग रणनीतिक देशों में सक्रिय कर दिया है. ये तीन धुरंधर हैं- विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री. ये तीनों अलग-अलग देश की यात्रा पर हैं. इन तीन यात्राओं का मकसद साफहै- ऊर्जा सुरक्षा बहाल करना, सप्लाई चेन सुधारना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना.
जयशंकर की यूएई यात्रा
इसी क्रम में विदेश मंत्री जयशंकर यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात जा रहे हैं. जयशंकर की यूएई यात्रा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यूएई भारत का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार है. संकट की घड़ी में स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है. जयशंकर की इस यात्रा का मकसद न केवल ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक संबंधों को भी सुरक्षित रखना है. यूएई भारत की तेल आयात का अहम हिस्सा है.
- विदेश मंत्री एस जयशंकर 11-12 अप्रैल को यूएई का दौरा कर रहे हैं. यह युद्धविराम के तुरंत बाद भारत का सबसे ऊंचा स्तर का संपर्क है. यूएई के नेतृत्व से व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तृत बातचीत होगी. जयशंकर ऊर्जा सुरक्षा, सुरक्षित नौवहन और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर देंगे. यूएई भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार है और हार्मुज संकट में भी वैकल्पिक रास्ते तलाशने में मददगार साबित हो सकता है. जयशंकर को ‘गेमचेंजर’ इसलिए माना जा रहा है क्योंकि उनकी कूटनीति न सिर्फ खाड़ी देशों को भारत के साथ जोड़ेगी, बल्कि पूरे वेस्ट एशिया में स्थिरता लाएगी.
जयशंकर यूएई तो हरदीप पुरी कतर के दौरे पर
कतर दौरे पर पुरी
वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर में कमान संभालेंगे. कतल एलपीजी का एक बड़ा निर्यातक देश है. भारत में करीब 47 फीसदी एलपीजी कतर से ही आता है. कतर के साथ भारत के लंबे समय से ऊर्जा संबंध रहे हैं और मौजूदा हालात में यह साझेदारी और भी अहम हो जाती है. माना जा रहा है कि पुरी की यह यात्रा एलपीजी आपूर्ति को स्थिर रखने और संभावित कीमत वृद्धि को नियंत्रित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार और शुक्रवार की आधिकारिक यात्रा पर हैं.
- हरदीप पुरी कतर के साथ एलएनजी सप्लाई को लेकर अहम बातचीत करेंगे. कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है. हाल के ईरान संघर्ष में कतर की ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. कतर एनर्जी की मानें तो ईरान के हमलों से देश की करीब 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है.
जयशंकर के दूत की अमेरिका यात्रा
उधर जयशंकर के अहम दूत विक्रम मिस्री अमेरिका में हैं. मौजूदा वक्त में उनकी यह यात्रा भी काफी अहम मानी जा रही है. अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाजार और रणनीतिक नीतियों में एक प्रमुख खिलाड़ी है. मिस्री की यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति विविधीकरण और भू-राजनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत का मंच बन सकती है. जिस तरह से पाकिस्तान कूद-कूदकर अमेरिका की गुलामी में लगा है. ऐसे में विक्रम मिस्री का अमेरिका जाना, भारत के लिए एक गेमचेंजर हो सकता है. इसतरह से इन तीनों यात्राओं के जरिए भारत का यह साफ संदेश है कि यह किसी भी वैश्विक संकट के दौरान अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक स्थिरता को लेकर पूरी तरह सजग और सक्रिय है. एलपीजी संकट जैसे मुद्दों पर समय रहते कूटनीतिक पहल भारत को संभावित झटकों से बचा सकती है.
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