Sunday, May 10, 2026
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रेलवे की इस साल की उपलब्धि, जिससे विश्‍व रिकार्ड बने, पता है आपको


नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे यह साल खास रहा है. 2025 में ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसकी वजह से विश्‍व रिकार्ड बना. अनूठे कामों से न केवल कनेक्टिविटी बेहतर हुई, बल्कि इंजीयरिंग के क्षेत्र में भी भारतीय रेलवे ने अलग पहचान बनाई है. ये परियोजनाएं इंजीनियरिंग के अद्भुत उदाहरण हैं, जो कठिन और दुर्गम इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ रही हैं. साथ ही ये पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर तैयार कर रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.

सबसे ज्यादा चर्चा में चिनाब ब्रिज है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है, जो जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी के ऊपर बना है. इसकी ऊंचाई 359 मीटर है, जो एफिल टॉवर से भी करीब 35 मीटर ज्यादा है. 1,315 मीटर लंबा यह स्टील पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना (USBRL) का हिस्सा है. इस पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भूकंप और तेज हवाओं जैसे गंभीर प्राकृतिक दबावों का भी सामना कर सके. चिनाब ब्रिज के पूरा होने से कश्मीर घाटी पूरे साल रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई है.

अंजी ब्रिज

इसी परियोजना में अंजी ब्रिज भी शामिल है, जो भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज है. यह चिनाब घाटी के कठिन इलाकों में बनाया गया है. इसके निर्माण से रेल कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है. अंजी पुल की इंजीनियरिंग बेहद खास है क्योंकि यह पहाड़ी इलाके में गहरी घाटी के ऊपर बना है.

पंबन ब्रिज

दक्षिण भारत में नया पंबन ब्रिज इंजीनियरिंग की एक और मिसाल है. यह भारत का पहला वर्टिकल-लिफ्ट समुद्री रेल पुल है, जो तमिलनाडु में रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ता है. यह लगभग 2.08 किलोमीटर लंबा है और समुद्र में तेज हवाओं व लहरों जैसी कठोर परिस्थितियों को झेलने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. इस पुल में एंटी-करोशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी उम्र 50 साल से अधिक होगी. नया पंबन ब्रिज न सिर्फ रेलवे के लिए, बल्कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी वरदान साबित हुआ है.

बैरबी-सैरांग रेल लाइन

पूर्वोत्तर भारत में बैरबी-सैरांग रेल लाइन एक ऐतिहासिक परियोजना है. इस 51 किलोमीटर लंबी रेल लाइन ने मिजोरम को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ने का सपना पूरा किया है. इस लाइन में 45 सुरंगें और 142 पुल शामिल हैं. इनमें ब्रिज नंबर 144 सबसे खास है, जिसकी ऊंचाई 114 मीटर है, यानी यह कुतुब मीनार से करीब 42 मीटर ऊंचा है. इसी लाइन से मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार रेल मार्ग से जुड़ी है.



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