मुजफ्फरपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनाए गए स्पाइनल रोड पर स्थित स्मार्ट नाला महज एक साल के अंदर ही टूटने लगा है। बैरिया गोलंबर से झिटकहियां के बीच लगभग पांच स्थानों पर नाले का ऊपरी कन्क्रीट भाग टूट चुका है। कई जगहों पर सिर्फ सरिया बच गया है, जबक
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इस रास्ते पर दिन-रात भारी गाड़ी की आवाजाही होती है। ऐसे में टूटे स्लैब और खुले सरिये सड़क के किनारे दुर्घटना का बड़ा खतरा बन गए हैं। क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिससे देर रात और कोहरे में हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
49 करोड़ की परियोजना पर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
स्मार्ट सिटी के 49 करोड़ रुपए की लागत से बने 4.6 किमी स्पाइनल रोड के दोनों ओर 9.2 किमी लंबा स्मार्ट नाला बनाया गया है। सबसे पहले बैरिया गोलंबर से लक्ष्मी चौक के बीच नाला निर्माण शुरू हुआ था।
नाला टूट रहा है।
अब उसी हिस्से में बड़ी खराबी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी वाहनों के दबाव और खराब निर्माण सामग्री के कारण ऊपरी स्लैब टूट रहे हैं। बीते पखवाड़े में क्षतिग्रस्त हिस्सों की संख्या लगातार बढ़ी है।
इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने जताई चिंता
निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी कमी पर विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।“नाले का ऊपरी हिस्सा टूटने से साफ है कि मानकों के अनुसार निर्माण नहीं हुआ है। इस्तेमाल सरिया, कॉन्क्रीट और मोटाई तकनीकी मानक से कमजोर दिख रहे हैं।”
ई. ब्रजेश्वर ठाकुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ प्रेक्टिसिंग इंजीनियर्स के अनुसार स्लैब और टूटे किनारों से दुर्घटना का खतरा है।
स्थानीय निवासी मेघन साह, गोपाल सहनी समेत कई लोगों ने बताया रात में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से स्लैब और गड्ढे दिखाई नहीं देते। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
खासकर बाइक, ऑटो और ई-रिक्शा वाले लगातार जोखिम में हैं।

गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
”पिछले साल भी इसी हिस्से में समस्या आई थी और तत्कालीन अधिकारियों के निर्देश पर स्लैब रखवाया गया था, लेकिन कई जगह स्लैब टूटे, हिल रहे हैं या सड़क के स्तर से 5–6 इंच ऊंचे हैं।
नगर आयुक्त ने कार्रवाई का दिया निर्देश
इस संबंध में नगर आयुक्त सह एमडी, MSCL विक्रम विरकर ने कहा है कि “क्षतिग्रस्त हिस्सों की जानकारी मिली है। निर्माण एजेंसी को तुरंत सुधार का निर्देश दिया गया है। देरी या लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
”आगे उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में नाला पूरी तरह जाम होने की आशंका है। ऐसे में जलजमाव और दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि टूटे स्लैब तुरंत बदले जाएं, नाले की सफाई हो, सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट लगाई जाए, निर्माण एजेंसी पर जिम्मेदारी तय हो।

