Thursday, May 14, 2026
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जयशंकर बोले-भारत नहीं चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार: फिर भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे; पुतिन से मिले भारतीय विदेशमंत्री


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मॉस्को13 मिनट पहले

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जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की, इस दौरान रूसी विदेश मंत्री भी मौजूद थे।

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने गुरुवार को मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, बल्कि चीन है।

जयशंकर ने आगे कहा- ‘रूस से LNG (नेचुरल गैस) खरीदने के मामले यूरोपीय यूनियन (EU) सबसे आगे है। वहीं, 2022 के बाद रूस के साथ ट्रेड बढ़ाने में भी कुछ दक्षिणी देश भारत से आगे हैं। फिर भी भारत पर हाई टैरिफ समझ से परे है।’ जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा। ट्रम्प का कहना है कि भारत के तेल खरीदने से रूस को यूक्रेन जंग लड़ने में मदद मिल रही है।

दोनों देश व्यापार घाटा कम करने पर भी काम करेंगे

जयशंकर ने भारत की जरूरतों के आधार पर रूस तेल की खरीद को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद भारत और रूस का रिश्ता दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहा है।

दोनों देशों ने व्यापार संतुलित करने के लिए भारत से रूस को कृषि, मेडिसन और कपड़े का इंपोर्ट बढ़ाने पर सहमति जताई।

जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस व्यापार में नॉन-टैरिफ दिक्कतों को हटाने और रेगुलेशन समस्याओं को जल्द सुलझाने के लिए काम करेंगे। इससे भारत का इंपोर्ट बढ़ेगा और ट्रेड डेफिसिट (व्यापार असंतुलन) कम होगा।

भारत को रूसी तेल खरीद पर 5% छूट मिल रही

रूसी डिप्लोमेट रोमन बाबुश्किन ने एक दिन पहले यानी बुधवार को कहा था कि रूस के कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि ये बहुत सस्ता है।

उन्होंने कहा था- रूसी कच्चे तेल पर भारत को करीब 5% की छूट मिल रही है। भारत इस बात को समझता है कि तेल आपूर्ति को बदलने का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे उसे बहुत ज्यादा मुनाफा हो रहा है। भारत पर अमेरिकी दबाव को भी रूस ने गलत बताया है।

भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था। मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है।

पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है।

रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा भारत

बाबुश्किन ने कहा- भारत के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन हमें भारत के साथ अपने रिश्तों पर भरोसा है। हमें विश्वास है कि बाहरी दबाव के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। उन्होंने ने ये भी कहा कि अगर भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में नहीं जा सकते, तो वे रूस की तरफ जा सकते हैं।

रूसी सेना में काम कर रहे भारतीय का मुद्दा भी उठाया

जयशंकर ने सर्गेई लावरोव के साथ बैठक में रूसी सेना में काम कर रहे भारतीयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई भारतीयों को रिहा किया जा चुका है, लेकिन ऐसे कुछ मामले अभी भी बने हुए हैं।

जयशंकर ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान जैसे मुद्दों पर बातचीत की। भारत ने शांति के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया।

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रूस बोला- हमारे कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं:भारत को 5% डिस्काउंट में दे रहे; अमेरिका के 50% टैरिफ को गलत बताया

रूस का कहना है कि उसके कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि ये बहुत सस्ता है। आज यानी, 20 अगस्त को सीनियर रूसी डिप्लोमेट रोमन बाबुश्किन ने ये बात कही।

उन्होंने कहा- रूसी कच्चे तेल पर भारत को करीब 5% की छूट मिल रही है। भारत इस बात को समझता है कि तेल आपूर्ति को बदलने का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे उसे बहुत ज्यादा मुनाफा हो रहा है। भारत पर अमेरिकी दबाव को भी रूस ने गलत बताया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

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