पूर्णिया में डॉक्टरों पर आए दिन हो रहे हमले करने का आरोप है। GMCH के खिलाफ सोशल मीडिया पर मरे हुए को जिंदा बताकर डॉक्टरों के खिलाफ उड़ाई गई अफवाह के विरोध में मंगलवार को जीएमसीएच के सभी डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।
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डॉक्टरों ने 16 अगस्त के प्रकरण की निंदा की और अपना विरोध जताया। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
इसमें सीनियर और जूनियर रेजिडेंस सभी डॉक्टर शामिल रहे। डॉक्टरों ने विरोध प्रकट करते हुए सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले यूट्यूब पर कार्रवाई करने की मांग की। कहा कि जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम की ओर से जब तक इन्हें चिन्हित कर कार्रवाई नहीं की जाती, वे काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे।
डॉक्टर की कोशिश के बाद गई जान
डॉ विकास कुमार ने कहा कि 16 अगस्त की दोपहर रोड एक्सीडेंट में घायल तीन लोगों को लेकर पुलिस जीएमसीएच पहुंची थी। डॉक्टर ने जांच किया तो दो की मौत हो चुकी थी और एक की हल्की सांसें चल रही थी। डॉक्टर ने उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन उसकी भी मौत हो गई। तीनों लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। एक शव का पोस्टमार्टम हो चुका था और दूसरे की तैयारी चल रही थी।
तभी तीसरे मृतक के परिजन भी वहां पहुंच गए और लाश से लिपट कर रोने-बिलखने लगे। जिससे मृतक के छाती व पेट पर दबाब पड़ने से उसके अंदरूनी रक्तस्राव बाहर आ गया। रक्त बाहर आते ही परिजनों को लगा कि वह जिंदा है।
शव को लेकर हंगामा किया
इससे आक्रोशित परिजन वहां से शव को लेकर हंगामा करते हुए इमरजेंसी वार्ड पहुंच गए। वहां ड्यूटी पर रहे डॉ. गोपाल कुमार झा के साथ गाली-गलौज व हाथापाई की। डॉक्टर जान बचाने के लिए भागने लगे तो मारपीट की गई।
अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बचा लिया गया। डॉक्टरों ने दोबारा से भी मृतक की जांच की, तो उसे मरा हुआ पाया। कुछ यूट्यूबर को पहले से ही वहां पर बुला लिया गया था। यूट्यूबरों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ने जान बूझकर मरे को जिंदा बताकर जीएमसीएच की छवि को धूमिल की और अफवाह फैलाया गया।
काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन करते डॉक्टर।
डॉक्टरों पर हमला आम बात है। झूठी अफवाह फैलाकर मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े चिकित्सकों पर हमला किया जा रहा है। ये चिकित्सकों के ऊपर हो रहे हमले का एक नया रूप है। अगर मरीज की मौत हो जाती है तो इसके लिए चिकित्सकों को जिम्मेवार ठहराना कहीं से उचित नहीं है।
कोई भी चिकित्सक किसी भी मरीज की जान बचाने की 100 फीसद गारंटी नहीं दे सकता। हम सभी डॉक्टर की मांग है कि हमारी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई हो। अन्यथा चिकित्सक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस मुद्दे पर डॉक्टर तारकेश्वर कुमार, डॉक्टर दिलीप कुमार, डॉक्टर राजेश भारती, डॉक्टर जितेंद्र कुमार, डॉक्टर कनिष्क कुणाल, डॉक्टर अपराजिता, डॉक्टर अभिषेक गुंजन ने भी अपना विरोध जताया।

