केदार शर्मा की पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।
भारतीय साहित्य परिषद की टोंक इकाई के सौजन्य से जिला परिषद सभागार भवन में केदार शर्मा की दो पुस्तकें कहानी संग्रह ‘वह अधूरी कहानी’ और व्यंग्य संग्रह ‘हर कहीं फैलता रायता’ का विमोचन एवं परिचर्चा कार्यक्रम हुआ।
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कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार एवं मुख्य अतिथि सूरज सिंह नेगी, अजीजुल्लाह शिरानी, पत्रकार विनोद शर्मा, राजकीय महाविद्यालय के हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ प्रमोद शर्मा, अशोक सक्सेना और साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ नरेश वर्मा ने पुस्तकों का विमोचन किया।
नेगी बोले- शब्द कभी मौन नहीं होते कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार सूरज सिंह नेगी ने कहा कि शब्द कभी मौन नहीं होते। शब्दों की ऊर्जा मनुष्य को झकझोरती है। उन्होंने कहा कि केदार शर्मा लंबे समय से साहित्य लेखन कर रहे हैं और व्यंग्य लेखन में उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में बनी है। इनके व्यंग्य की धार तेज है। कभी रुलाती है और कभी विसंगतियों पर हंसने के लिए विवश कर देती है। उन्होंने कहा कि केदार शर्मा की कहानियां आदर्शोन्मुखी हैं।
साहित्यकार केदार शर्मा की पुस्तकों के विमोचन में विचार व्यक्त करते अतिथि।
उर्दू-हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अजीजुल्लाह शिरानी ने केदार शर्मा की कहानियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि कहानी कहानी होती है, जो कभी खत्म नहीं होती और समाज का प्रतिबिंब लिए होती है। केदार शर्मा कहानियों के माध्यम से रचनात्मक अनुभव बांटते हैं।
शिरान ने संग्रह की सभी 13 कहानियों की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत कर कर कार्यक्रम श्रोताओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अधिकतर कहानियों का अंत सकारात्मक है और सभी कहानियां नारी प्रधान है।
व्यंग्य संग्रह पर प्रस्तुत की समीक्षा वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में टोंक के संदर्भ में अपने समय के साहित्य लेखन और अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि केदार शर्मा और अनेक स्थानीय साहित्यकारों ने उस समय स्थानीय अखबारों में लेखन कर साहित्य को समृद्ध किया था। डॉ प्रमोद शर्मा ने व्यंग्य संग्रह पर अपने विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर नरेश वर्मा ने कहा कि केदार शर्मा की कहानियों में यथार्थ, सामाजिकता, और आंचलिकता का भाव समावेशित है। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की प्रारंभिक कहानी ईदगाह और अंतिम कहानी कफन का तुलनात्मक विवेचन किया।
कार्यक्रम में मंच संचालन कवयित्री एवं गजलकार ममता मंजुला ने किया। कार्यक्रम में ब्रजराज जी “स्नेही”, साहित्य परिषद टोंक इकाई के संरक्षक, रमेश चन्द चौधरी, पत्रकार मनोज तिवारी, हीरालाल शर्मा, राजेंद्र शर्मा, हनुमान बादाम, शिमला शर्मा आदि उपस्थित थे।

