Thursday, May 7, 2026
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वाराणसी में 9CM की रफ्तार से बढ़ रही गंगा: घाट किनारे दुकान गलियों में लगे, 84 घाट का संपर्क टूटा, शवदाह गली में शिफ्ट हुआ – Varanasi News


वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा का असर अब काशी में भी साफ दिखने लगा है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को गंगा का जलस्तर 68.94 मीटर तक पहुंच गया है और यह 9 सेंटीमी

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पहले देखें तस्वीर…

अस्सी घाट के गली के तरफ बढ़ी गंगा‌।

घाट किराने के सभी छोटे बड़े मंदिर डूबे।

घाट किराने के सभी छोटे बड़े मंदिर डूबे।

सुबह ए बनारस मंच फिर डूबा‌।

सुबह ए बनारस मंच फिर डूबा‌।

पानी में घुसकर नाविक अपने नाव बांध रहे।

पानी में घुसकर नाविक अपने नाव बांध रहे।

नमो घाट का नमस्ते प्लेटफार्म ढूबा।

नमो घाट का नमस्ते प्लेटफार्म ढूबा।

घाटों पर पानी, शवदाह में दिक्कत

गंगा का बढ़ता पानी अब नमो घाट पर बने सबसे बड़े स्कल्पचर से आगे तक पहुंच चुका है। शीतला घाट मंदिर में दूसरी बार पानी प्रवेश कर गया है। वहीं, हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। इससे शवदाह की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। मणिकर्णिका घाट पर छत पर शवदाह करना पड़ रहा है, जबकि हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह किया जा रहा है। परंपरागत स्थानों पर अंतिम संस्कार न हो पाने से परिजन परेशान हैं।

मणिकर्णिका घाट छत पर हो रहा शवदाह।

मणिकर्णिका घाट छत पर हो रहा शवदाह।

चेतावनी और खतरे की स्थिति

वाराणसी में गंगा के जलस्तर के लिए चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर, खतरा बिंदु 71.263 मीटर और अधिकतम बिंदु 73.90 मीटर तय है। फिलहाल गंगा जलस्तर तेजी से खतरे की ओर बढ़ रहा है। अगस्त के पहले सप्ताह में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह चुकी थी, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया था और लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस बार भी हालात गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। फाफामऊ, प्रयागराज और मिर्जापुर में भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर सीधे वाराणसी पर पड़ रहा है।

दुकान गलियों में हुआ शिफ्ट।

दुकान गलियों में हुआ शिफ्ट।

दुकानदारों की रोज़ी-रोटी पर संकट

बढ़ते जलस्तर का सबसे बड़ा असर घाट किनारे दुकानदारों पर पड़ा है। वाराणसी के 84 घाटों पर करीब 10 हजार दुकानदार अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं। एक घाट पर औसतन 80 से 100 दुकानें लगती हैं, जिनमें फूल-माला, पूजा सामग्री और चाय-नाश्ते की दुकानें प्रमुख हैं। नगर निगम समय-समय पर इन्हें हटाता जरूर है, लेकिन घाट किनारे ही इनकी आजीविका जुड़ी रहती है। अब गंगा का जलस्तर बढ़ने से सभी दुकानें बंद हो गई हैं। प्रतिदिन कमाने-खाने वाले इन दुकानदारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट गहरा गया है।

दुकानदारों ने कहा - तीसरी बार दुकान बंद करना पड़ रहा।

दुकानदारों ने कहा – तीसरी बार दुकान बंद करना पड़ रहा।

दुकानदारों का कहना है कि जिनके पास राशन कार्ड है उन्हें सरकार से अनाज मिल रहा है, लेकिन जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानदार घाट की गलियों में छोटे-छोटे स्टॉल लगाकर किसी तरह शाम तक कुछ कमाई कर रहे हैं ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके।

प्रशासन अलर्ट, लोगों से सावधानी बरतने की अपील

लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन घाटों पर चौकसी बढ़ा रहा है। लोगों को निचले इलाकों से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमों को सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके।



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