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Indian Airforce MiG-21: भारतीय वायुसेना ने मिग के कई वेरिएंट्स का इस्तेमाल किया जिसमें मिग 21 टाइप 77, मिग 21 बिज (टाइप 75), मिग 21 टाइप 96, मिग 25, मिग 21 बिज, मिग 21 बाइसन और मिग 29 शामिल हैं. मिग 21 टाइप 69 …और पढ़ें
मिग 21 की आखिरी उड़ान 26 सितंबर को रिटायरमेंट के बाद क्या होगा मिग 21 का?
मिग 21 बाइसन 26 सितंबर के बाद चंडीगढ़ से नाल एयरबेस के लिए उड़ान भरेंगे. रिटायरमेंट के बाद नंबर 3 स्क्वॉड्रन कोबरा और नंबर 23 स्क्वॉड्रन पैंथर्स दोनों की नंबर प्लेटिंग हो जाएगी. नंबर प्लेटिंग का मतलब इन दो स्क्वॉड्रन के नंबर और इसकी लेगेसी फ्रीज हो जाएगी. जो भी नए एयरक्राफ्ट इन स्क्वॉड्रन में शामिल होंगे उन्हें इन्हीं नाम से जाना जाएगा. फिलहाल नंबर 3 स्क्वॉड्रन में पहला LCA मार्क 1A फाइटर मिलेगा. मिग 21 के नाल एयरबेस पहुंचने के बाद इसकी पूरी जांच होगी और रिपोर्ट बनेगी. जितने भी पार्टस् ठीक हैं और काम में लाए जा सकते हैं उन्हें निकाल लिया जाएगा और बाकी को स्क्रैप में निकाल दिया जाएगा. इंजिनियरिंग कॉलेज को अपने छात्रों की ट्रेनिंग या एयरक्राफ्ट को अगर किसी सेना के म्यूजियम या वॉर मेमोरियल में लगाना है तो उन्हें दे दिया जाएगा. अगर कोई सिविल में इन जेट के ढांचे को डिस्प्ले के लिए ले जाना चाहता है तो उसे एयर हेडक्वार्टर में दरख्वास्त देनी होती है. बाकायदा लिस्ट बनाई जाती है.ऐसा नहीं है कि सभी को मिग-21 के एयरफ्रेम दे दिए जाएंगे. वायुसेना के तय मानकों को जो भी पूरा करता है जिसमें उसकी देखरेख भी शामिल हो, उसकी हिसाब से जेट को सौंपा जाता है. अमूमन बड़ी यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री, सरकारी इमारतों में इस तरह के रिटायर जेट खड़े दिखाई दे जाते हैं.
अभी तक जितने भी मिग 21 रिटायर हुए हैं उनमें से कई को डिस्प्ले के लिए लगाया गया है. जिनमें से चंडीगढ़ के भारतीय वायुसेना हेरिटेज म्यूजियम में मिग 21 सिंगल सीटर को डिस्प्ले किया गया है. यह भारत का पहला एयर फ़ोर्स हेरिटेज सेंटर है. दिल्ली IAF म्यूज़ियम और पलम एयरफोर्स स्टेशन के बाहर भी मिग 21 शान से खड़े हैं. कोलकाता के साल्ट लेक के पास नीको पार्क, ओडीशा के सुनाबेडा में बि़जू पट्टनायक एरोनॉटिक्स म्यूजियम (HAL), दिल्ली में राष्ट्रपति भवन संग्रहालय, प्रयागराज के चंद्रशेखर पार्क, बैंगलोर के HAL हेरिटेज सेंटर एंड एयरोस्पेस म्यूजियम के अलावा भी कई जगह पर मिग के अलग-अलग वेरियेंट को रिटायर होने के बाद रखा गया है.
क्या होगा मिग 21 के फाइटर पायलटों का?
सामान्य तौर पर तो अपनी मर्जी से पायलट अपनी स्ट्रीम नहीं बदल सकते. फ्लाइंग स्ट्रीम में फाइटर, फिक्स्ड विंग ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर पायलट आते हैं. फाइटर पायलट ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर दोनों स्ट्रीम में जा सकता है. यह सब निर्भर करता है कि बदलाव का क्या कारण है? मेडिकल ग्राउंड सबसे बड़ा कारण होता है. मिग 21 चूंकि रिटायर हो रहे हैं तो उन पायलटों के पास एक वाजिब कारण है अपनी स्ट्रीम को बदलने का. वायुसेना के पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम में अलग-अलग फाइटर जेट स्पेशलाइजेशन के ऑप्शन होते हैं जिन्हें प्राइमरी ट्रेनिंग के बाद किया जाता है. मिग के पायलटों को दूसरे किसी फाइटर के लिए ऑप्ट करना है तो उन्हें 3 से 6 महीने की ट्रेनिंग से गुजरना होगा क्योंकि हर एयरक्राफ्ट अलग होता है. इसके अलावा मिग 21 के पायलट टेस्ट पायलट भी बन सकते हैं और लॉजिस्टिक ब्रांच, एडमिन ब्रांच में भी जा सकते हैं.

