Thursday, May 7, 2026
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भारत-रूस को मिला वो ‘घातक’ अस्त्र, जिससे डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बम होगा फुस्स


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भारत-रूस को मिला वो 'घातक' अस्त्र, जिससे डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बम होगा फुस्सरूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)
मॉस्को/नई दिल्ली: भारत ने अमेरिकी टैरिफ की काट निकाल ली है. उसने रूस के साथ मिलकर एक ऐसा घातक आर्थिक ‘अस्त्र’ तैयार किया है, जिससे भारत पर डोनाल्ड ट्रंप का लगाया गया 50% टैरिफ बम फुस्स होकर रह जाएगा. संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) की तरफ से टैरिफ़-आधारित बातचीत के कारण वैश्विक व्यापार व्यवस्था में आ रहे बदलाव के बीच, विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर की हाल ही में संपन्न रूस यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आई है, जिसमें व्यापार गलियारों (ट्रेड कॉरिडोर) को फिर से जीवित करते हुए आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने के तरीक़ों पर विचार-विमर्श किया गया. यह जानकारी शनिवार को एक रिपोर्ट में दी गई.

विदेश मंत्री की मॉस्को यात्रा ने वर्ष के अंत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा के लिए भी मंच तैयार किया. इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा और कच्चे माल से आगे बढ़कर व्यापार वस्तुओं के विविधीकरण का आह्वान किया. इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की प्रासंगिकता, निवेश और विदेशी व्यापार को आकर्षित करना आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कुंजी होगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, “यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) व्यापार वार्ता को फिर से शुरू करने पर ध्यान आकर्षित किया गया, जो रूस-यूक्रेन संबंधों में गिरावट के बाद 2022 में रुक गई थी.” दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से थोपे गए 50% टैरिफ बम को भारत अपने सबसे पुराने और गहरे दोस्त रूस के जरिए पटखनी दे रहा है. भारत ने कई बार साफ संकेत भी दे दिया है कि वह अमेरिका टैरिफ के दबाव में कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, “यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) व्यापार वार्ता को फिर से शुरू करने पर ध्यान आकर्षित किया गया, जो रूस-यूक्रेन संबंधों में गिरावट के बाद 2022 में रुक गई थी.” रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने यह भी कहा कि रूस भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यात करने की संभावना देखता है. उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूसी तेल खरीद पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद आई है, जिसे क्रेमलिन ने “अवैध” बताया है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत-रूस संबंधों ने ऐसे व्यापार गलियारों और तंत्रों की खोज की है जिनके माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. इसमें कहा गया है, “इस संबंध में, पूर्वी आर्थिक मंच, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक पूर्वी समुद्री गलियारा और सहयोग इसके उदाहरण हैं.”

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

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