Thursday, May 7, 2026
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पिज़्ज़ा-बर्गर को कहें ना! बाजरा और गुड़-चना को बनाएं अपना दोस्त, दादी-नानी के नुस्खों में छिपा है सेहत का राज


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Benefits of Traditional Indian Food: फास्ट फूड के दुष्प्रभावों से बचने के लिए लोग अब बाजरा. ज्वार और गुड़ जैसे पारंपरिक भोजन को अपना रहे हैं. मोटे अनाज और घर का सादा खाना न केवल मोटापा कम करता है. बल्कि इम्युनिटी बढ़ाकर शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखता है.

तेजी से बदलती जीवनशैली और फास्ट फूड के प्रति बढ़ते रुझान ने आधुनिक समाज में स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. कामकाज की अत्यधिक व्यस्तता और समय के अभाव के चलते लोग पैकेट बंद (Processed Food) और बाहर के खान-पान पर अधिक निर्भर हो गए हैं, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव उनकी सेहत पर पड़ रहा है. इस भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच, अब लोग एक बार फिर अपने देसी और पारंपरिक खान-पान की ओर रुख कर रहे हैं. हमारे पारंपरिक भोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें न केवल बेहतरीन स्वाद होता है, बल्कि यह पोषण और प्राकृतिक संतुलन का एक अनूठा मिश्रण भी है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान और निरोगी बनाए रखने में सहायक होता है.

फास्ट फूड से दूरी, देसी खानपान से दोस्ती: बाजरा, ज्वार और गुड़ बने सेहत का देसी फॉर्मूला...

बाजरा, ज्वार, मक्का और रागी जैसे मोटे अनाज हमारे पारंपरिक देसी भोजन की असली पहचान हैं. इन अनाजों में फाइबर, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करने और शरीर के ढाँचे को सुदृढ़ बनाने में सहायक होते हैं. इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या नहीं होती. नियमित रूप से मोटे अनाजों को अपने आहार में शामिल करने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है और मोटापे जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलती है.

फास्ट फूड से दूरी, देसी खानपान से दोस्ती: बाजरा, ज्वार और गुड़ बने सेहत का देसी फॉर्मूला...

देसी खानपान में गुड़. चना. मूंगफली और तिल जैसे खाद्य पदार्थों का न केवल स्वाद के लिए बल्कि औषधीय महत्व के कारण भी विशेष स्थान है. सर्दियों के मौसम में मेथी. तिल और गुड़-चने का सेवन हमारे शरीर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. ये खाद्य पदार्थ शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखने के साथ-साथ शारीरिक कमजोरी दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अत्यंत सहायक होते हैं. आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में इन पारंपरिक देसी पदार्थों को ही उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का मुख्य आधार माना जाता है.

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फास्ट फूड से दूरी, देसी खानपान से दोस्ती: बाजरा, ज्वार और गुड़ बने सेहत का देसी फॉर्मूला...

घर का सादा भोजन जैसे दाल. सब्जी. रोटी और छाछ शरीर के लिए एक संपूर्ण आहार माना जाता है. इसमें तेल और मसालों का उपयोग अत्यंत सीमित होता है. जिससे हमारे पाचन तंत्र पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है. रोजाना घर का बना शुद्ध और संतुलित खाना खाने से पेट से जुड़ी तमाम समस्याएं कम हो जाती हैं. इसके साथ ही सात्विक भोजन के कारण शरीर मानसिक और शारीरिक रूप से हल्का और चुस्त महसूस करता है.

फास्ट फूड से दूरी, देसी खानपान से दोस्ती: बाजरा, ज्वार और गुड़ बने सेहत का देसी फॉर्मूला...

आयुर्वेदाचार्य श्रीराम वैद्य के अनुसार देसी और संतुलित खानपान शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है. आज जब लोग महंगे डाइट प्लान और सप्लीमेंट्स पर निर्भर हो रहे हैं. तब देसी भोजन कम लागत में बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहा है. इसी कारण लोग पारंपरिक भोजन को दोबारा अपनी लाइफस्टाइल में शामिल कर रहे हैं.

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