सोशल मीडिया वेबसाइट रेडिट पर इसको लेकर खूब चर्चा चल रही है. दरअसल, यह कहानी एक आईटी प्रोफेशनल महिला और उसके पति की है. 34 साल की आईटी प्रोफेशनल पत्नी ने अपनी पोस्ट में पूछा, “क्या मुझे अपने पति को गुजारा भत्ता देना होगा?” महिला ने बताया कि वह तलाक लेने की सोच रही हैं. लेकिन उन्हें चिंता है कि क्या उन्हें अपने पति को आर्थिक मदद देनी पड़ेगी. महिला ने बताया कि वह हर साल करीब 75 लाख रुपये कमाती हैं, जबकि उनके 35 साल के पति हर महीने 1.2 लाख रुपये कमाते हैं, यानी सालाना करीब 14 लाख रुपये. उन्होंने कहा कि उनकी पांच साल की शादी में पति ने उनके साथ आर्थिक और भावनात्मक रूप से बुरा व्यवहार किया है. अब उनके पति उनसे पैसे की मांग कर रहे हैं.
महिला ने लव मैरिज किया था
इस पोस्ट के बाद रेडिट पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कुछ ने कानूनी और आर्थिक पहलुओं पर अपनी राय दी. एक यूजर ने लिखा- हां, अगर आपकी कमाई से उनके लाइफ स्टाइल का खर्च चल रहा था, तो वह गुजारा भत्ता मांग सकते हैं. लेकिन चूंकि उनके पास स्थायी सरकारी नौकरी और रहने की सुविधा है, इसलिए गुजारा भत्ता कम हो सकता है या संभवतः माफ भी हो जाए, अगर आपने उनकी जीवनशैली के लिए सीधे तौर पर फंड नहीं किया.
पत्नी, पति से पांच गुना अधिक कमाती है
कुछ लोगों ने महिला का समर्थन भी किया. एक यूजर ने लिखा- वह सरकारी कर्मचारी हैं, तो शायद वह रिश्वत से भी काफी पैसे कमा रहे होंगे. यह मामला पैसे से ज्यादा नियंत्रण का लगता है. यह दुखद है कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए उनके साथ हैं क्योंकि वह पति हैं. मजबूत रहें, यह किसी के साथ भी हो सकता है, शायद कल को उनकी बहनों के साथ भी.
महिला ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि वह इस मामले को लेकर काफी डरी हुई हैं और चाहती हैं कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो. यह मामला न केवल तलाक और गुजारा भत्ते के कानूनी पहलुओं को उजागर करता है, बल्कि समाज में लैंगिक भूमिकाओं और आर्थिक असमानता पर भी सवाल उठाता है. आमतौर पर पुरुषों को गुजारा भत्ता देने की बात होती है, लेकिन इस मामले में पत्नी की ज्यादा कमाई ने इसे एक अनोखा उदाहरण बना दिया है. लोग इस पर बहस कर रहे हैं कि क्या ज्यादा कमाने वाली पत्नी को अपने पति को गुजारा भत्ता देना चाहिए, खासकर तब जब पति की अपनी अच्छी खासी कमाई और सरकारी नौकरी हो.
महिला ने अपनी पोस्ट में यह भी जिक्र किया कि वह अपने पति के व्यवहार से तंग आ चुकी हैं और अब वह अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना चाहती हैं. उनकी यह कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा हो सकती है, जो ऐसी परिस्थितियों में फंसे हैं और अपने हक के लिए लड़ने की हिम्मत जुटा रहे हैं. यह मामला यह भी दिखाता है कि आज के समय में महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए भी जागरूक हैं.

