उदयपुर जिले के 90 बच्चे सूरत (गुजरात) की फैक्ट्रियों में काम कर रहे थे। उदयपुर की मानव तस्करी निरोधी यूनिट और राज्य बाल आयोग की टीम ने बुधवार को कार्रवाई कर इनको रेस्क्यू किया। ये बच्चे उदयपुर जिले के आदिवासी क्षेत्रों के हैं। इनकी उम्र 7 से 14 साल है। सूरत के टेक्सटाइल मार्केट से जुड़ी छोटी-छोटी फैक्ट्रियों या यूनिट्स में इनसे मजदूरी करवाई जा रही थी। कुछ बच्चे साड़ियों में धागे का वर्क करते थे तो कुछ बच्चे मशीन चलाते थे। इनको मजदूरी के नाम पर महज 5 हजार से 8 हजार रुपए प्रति माह तक दिए जा रहे थे। इनमें से कई बच्चे कुछ महीने पहले ही मजदूरी करने सूरत गए थे। ज्यादातर बच्चे स्कूल से ड्रॉपआउट हैं। सूरत के पूना थाना इलाके में सीताराम सोसाइटी, मुक्तिधाम सोसाइटी समेत करीब 6 जगहों पर यह कार्रवाई हुई। बच्चों से मजदूरी करवाने की मिली थी जानकारी राज्य बाल आयोग के पूर्व सदस्य शैलेन्द्र पंड्या ने बताया- पिछले एक महीने से उदयपुर जिले के आदिवासी क्षेत्रों के गरीब बच्चों को वहां ले जाकर मजदूरी करवाने की जानकारी मिल रही थी। इस पर 20 लोगों की टीम ने पूरे प्लान के साथ बुधवार को सिलसिलेवार तरीके से एक के बाद एक कई जगह रेड मारी। बच्चों को मुक्त करवाया। टीम बच्चों के साथ ही फैक्ट्री संचालकों से पूछताछ कर रही है। टीम बच्चों के परिजनों से भी पूछताछ कर सकती है। उन्होंने बताया- बाल आयोग ने 2019 में भी सूरत में रेड डालकर बच्चों को मुक्त करवाया था। सभी बच्चे उदयपुर जिले के रहने वाले थे।
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