What is Kaveri Engine: सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक ऑनलाइन अभियान ‘फंड कावेरी इंजन’ काफी ध्यान खींच रहा है. यह अभियान भारत के रक्षा मंत्रालय द्वारा एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने के कुछ समय बाद शुरू हुआ. यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहा है. क्योंकि हजारों यूजर्स सरकार से स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी में निवेश करने और विदेश निर्मित लड़ाकू जेट इंजनों पर निर्भरता कम करने का आग्रह कर रहे हैं.
क्या है कावेरी इंजन
आइए जानें कावेरी इंजन और इसके विकास से भारत की रक्षा प्रणाली को क्या लाभ होगा. कावेरी इंजन स्वदेशी रूप से विकसित टर्बो इंजन है, जिसका उपयोग हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में किया जाता है. इसे लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए डिजाइन और विकसित किया गया है. इसका उपयोग लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) को शक्ति प्रदान करने और विदेशी जेट इंजनों पर निर्भरता कम करने के लिए किया जाता है. यह 80 किलोन्यूटन (kN) थ्रस्ट वाला लो बाईपास, ट्विन स्पूल टर्बोफैन इंजन है. इंजन में उच्च गति और उच्च तापमान की स्थितियों में थ्रस्ट हानि को कम करने के लिए एक फ्लैट-रेटेड डिजाइन है. बढ़ी हुई विश्वसनीयता के लिए मैनुअल ओवरराइड के साथ एक ट्विन-लेन फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्टम शामिल है.
इसे किसने बनाया
कावेरी इंजन को गैस टर्बाइन रिसर्च इस्टैब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डीआरडीओ (DRDO) के तहत विकसित किया जा रहा है. यह स्वदेशी रूप से विकसित लड़ाकू जेट इंजन परियोजना है. कावेरी परियोजना भारत में 1980 के दशक में भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को शक्ति प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी. भारत का ये महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट देश के डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. लेकिन यह तकनीकी और राजनैतिक चुनौतियों के कारण चर्चा में बना हुआ है.
क्यों हुई देरी
इस परियोजना को विभिन्न चुनौतियों के कारण तमाम बाधाओं और देरी का सामना करना पड़ा है. काम्पलेक्स एडवांस टेक्नॉलॉजी की जरूरत, पश्चिम का बैन, ट्रेंड वर्कफोर्स की कमी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता इसकी देरी के प्रमुख कारण थे. इस इंजन को 2008 में तकनीकी चुनौतियों के कारण तेजस से अलग कर दिया गया था. जिनमें अपेक्षित थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात प्राप्त करने में असमर्थता, उच्च तापमान धातु विज्ञान में कमियां और आफ्टरबर्नर प्रदर्शन और विश्वसनीयता में समस्याएं शामिल थीं. चूंकि कावेरी इंजन तेजस एमके1 की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता था. इसलिए लड़ाकू विमान को अमेरिकी निर्मित जीई एफ404 इंजन से संचालित किया जाना था.
तकनीकी चुनौतियां
तकनीकी चुनौतियों के अलावा भारत के पास ऐसे इंजनों के लिए परीक्षण सुविधाओं का भी अभाव था. कावेरी इंजन के परीक्षण के लिए भारत को रूस पर निर्भर रहना पड़ता था. जिससे शेड्यूल में देरी होती थी और फ्लेक्सिबिलिटी सीमित होती थी. शुरुआती चरण में भारत ने कावेरी इंजन को बिना किसी विदेशी मदद के स्वदेशी रूप से विकसित करने की कोशिश की. इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग में देरी हुई. फ्रांस के स्नेक्मा/सफ्रान के साथ सहयोग बहुत देर से हुआ. कावेरी इंजन परियोजना को निर्णय लेने में देरी, उद्योग समन्वय की कमी, बजट सीमाओं और अकुशल परियोजना प्रबंधन का भी सामना करना पड़ा.
कावेरी की वर्तमान स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार कावेरी इंजन रूस में उड़ान परीक्षण से गुजर रहा है, जिसमें लगभग 25 घंटे का परीक्षण बाकी है. ये परीक्षण वास्तविक दुनिया की स्थितियों में इंजन के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं. इस इंजन को अब भारत के स्वदेशी लंबी दूरी के मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) जैसे घातक स्टील्थ ड्रोन को शक्ति प्रदान करने के लिए फिर उपयोग में लाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर कावेरी इंजन को लेकर दिलचस्पी तब बढ़ी जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकी शिविरों को सफलतापूर्वक नष्ट करने के लिए यूएवी का इस्तेमाल किया था.
विदेश पर कम होगी निर्भरता
इस बीच, भारतीय नौसेना ने छोटे युद्धपोतों को शक्ति प्रदान करने के लिए कावेरी मरीन गैस टर्बाइन (केएमजीटी) के विकास के माध्यम से कावेरी जेट इंजन को समुद्री एप्लीकेशंस के लिए कस्टमाइज करने के लिए जीटीआरई के साथ सहयोग किया है. विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना की मरीन गैस टर्बाइन टेस्ट फैसिलिटी में इस इंजन का सफल परीक्षण किया गया है, जो नौसेना एप्लीकेशंसके लिए इसकी क्षमता को दर्शाता है. बड़े नौसैनिक जहाजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए केएमजीटी के विद्युत उत्पादन को 12 मेगावाट से अधिक बढ़ाने के प्रयास भी चल रहे हैं. कावेरी इंजन परियोजना डिफेंस टेक्नॉलॉजी में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए महत्वपूर्ण है. इस प्रयास में सफलता से न केवल विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि उन्नत एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म विकसित करने में देश की क्षमताएं भी बढ़ेंगी.
सोशल मीडिया पर अभियान
सोशल मीडिया पर भारतीयों ने #FundKaveriEngine अभियान चलाया हुआ है. इसमें लोगों ने सरकार से अधिक टैक्स लेने और कावेरी इंजन को अपडेट करने की मांग भी की है. उत्साही लोगों ने कावेरी इंजन के विकास को प्राथमिकता देने और स्वदेशी लड़ाकू जेट इंजन के देश के सपने को पूरा करने के लिए इंटरनेट पर पोस्ट की बाढ़ ला दी है. 1980 के दशक में शुरू हुई यह परियोजना कई सालों से अटकी हुई थी, लेकिन अब भारत की आत्मनिर्भरता की खोज का प्रतीक बन गई है.

