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Bihar Congress News: बिहार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने संगठन को 243 सीटों पर मजबूत करने और आरजेडी पर निर्भरता खत्म करने का निर्देश दिया है. बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी शामिल रहे. कांग्रेस ने बिहार में 61 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से उसे केवल छह सीट पर जीत मिली, जो उसे पिछली बार मिली 19 सीट से काफी कम है.
नई दिल्ली/पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश इकाई को अब सभी 243 सीटों पर संगठन को मज़बूत करने और किसी सहयोगी के भरोसे नहीं रहने का एक स्पष्ट, कड़ा और रणनीतिक निर्देश दिया है. सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व ने शनिवार को आरजेडी का नाम लिए बिना साफ कहा है कि कांग्रेस को हर विधानसभा और 40 लोकसभा सीटों पर अपने पैरों पर खड़े होने की तैयारी करनी होगी. गौरतलब है कि अब तक कांग्रेस अक्सर ‘आरजेडी के प्रभाव वाले इलाकों’ में संगठनात्मक गतिविधियों को सीमित रखती थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यह रणनीति अब समाप्त मानी जाए. पार्टी की ताज़ा लाइन यह है – ‘पहले खुद को मजबूत करें, तभी कोई सहयोगी आपको महत्व देगा.’
हाल ही में कांग्रेस के कई उम्मीदवारों ने पार्टी को सलाह दी थी कि वह बिहार में आरजेडी से अलग होकर चुनाव लड़े. राजनीतिक गलियारों में इसे महागठबंधन की दिशा में गंभीर दरार के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है. दिल्ली में शनिवार को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई मीटिंग के बाद बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि चर्चा का फोकस ‘संगठन की मजबूती और पार्टी अनुशासन को कड़ाई से लागू करना’ था.
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में हुई चुनावी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व राज्य अध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं करेगा, लेकिन संगठनात्मक शिथिलता और कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता पर अब कठोर कदम उठाए जाएंगे. कांग्रेस ने बिहार में 61 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से उसे केवल छह सीट पर जीत मिली, जो उसे पिछली बार मिली 19 सीट से काफी कम है.
कांग्रेस की नई रणनीति के कई मतलब निकाले जा रहे हैं:
* आरजेडी पर निर्भरता खत्म करने का संदेश.
* सभी सीटों पर ग्राउंड-लेवल कैडर तैयार करने की योजना.
* अनुशासनहीन नेताओं पर कार्रवाई की तैयारी.
* बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस खुद को ‘स्वतंत्र राजनीतिक इकाई’ की तरह तैयार करेगी.
बिहार की राजनीति में यह कांग्रेस की सबसे बड़ी रणनीतिक शिफ़्ट मानी जा रही है, जहां पार्टी पहली बार स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि आगे के चुनाव में वह ‘भागीदार’ नहीं बल्कि ‘प्रतिस्पर्धी” के रूप में मैदान में उतरना चाहती है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

