बलराम जी चतुर्वेदी | कानपुर देहात3 मिनट पहले
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डेरापुर के बीआरसी परिसर में गौरैया संरक्षण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने गौरैया और अन्य पक्षियों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग, आधुनिक आवासों की कमी और रेडिएशन जैसे कई कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
पर्यावरण मित्र और राज्य अध्यापक अवार्डी नवीन कुमार दीक्षित ने बताया कि फसलों में कीटनाशकों के छिड़काव से गौरैया और अन्य पक्षी मर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे घरों की जगह पक्के मकान बनने और दिन भर खिड़कियां-रोशनदान बंद रहने से पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए जगह नहीं मिल पाती।

एआरपी वरुण बाजपेई ने रेडिएशन के दुष्प्रभावों को गौरैया की संख्या में लगातार कमी का एक प्रमुख कारण बताया। वहीं, एआरपी हर्षा नागपाल ने सीलिंग फैन से कट जाने को भी इनकी चहचहाहट शांत होने का कारण बताया। शिक्षक मोहित यादव ने विष मिश्रित बीज निगलने और प्राकृतिक कच्चे मकानों की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया।
प्रधानाध्यापक लक्ष्मी कान्त ने गौरैया को प्रकृति का सौंदर्य और जैव विविधता का उदाहरण बताया। शिक्षक भूपेंद्र कुमार ने कहा कि यह पक्षी घोंघी कीट से फसलों की सुरक्षा करता है। एआरपी अजय कुमार ने जानकारी दी कि यह मानव का सहगामी पक्षी लगभग सोलह सेंटीमीटर लंबा और बत्तीस ग्राम तक वजनी होता है।
संगोष्ठी में गौरैया संरक्षण के लिए समाज के लोगों से कृत्रिम घोंसले लगाने और दाना-पानी की व्यवस्था करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर शिक्षक महेश यादव, अजीत त्रिपाठी सहित कई छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

