Monday, May 18, 2026
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कितने बैंक अकाउंट रखना सही? एक्सपर्ट्स ने बताया कितना होना चाहिए सही नंबर


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आज के डिजिटल दौर में एक से ज्यादा बैंक अकाउंट होना आम बात बन गई है. कभी सैलरी अकाउंट, कभी कैशबैक ऑफर तो कभी ज्यादा ब्याज के लालच में लोग कई खाते खोल लेते हैं. लेकिन समय के साथ यही कई अकाउंट लोगों के लिए परेशानी, अतिरिक्त चार्ज और वित्तीय उलझन का कारण बन सकते हैं.

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ज्यादा खातों से हो सकता है पैसा और मानसिक शांति दोनों का नुकसान. (Representative Image:AI)

नई दिल्ली. अक्सर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे नए बैंक अकाउंट खोल लेते हैं. नौकरी बदलने पर नया सैलरी अकाउंट, शादी के बाद जॉइंट अकाउंट, ऑनलाइन ऑफर्स के लिए डिजिटल अकाउंट या ज्यादा ब्याज के नाम पर अलग खाता खोलना आज बेहद आम हो गया है. शुरुआत में हर अकाउंट जरूरी लगता है, लेकिन कुछ साल बाद कई लोगों के पास चार-पांच खाते हो जाते हैं जिनका कोई खास उपयोग नहीं रह जाता. समस्या तब शुरू होती है जब इन खातों को संभालना मुश्किल हो जाता है. अलग-अलग मिनिमम बैलेंस बनाए रखना, ऑटो डेबिट ट्रैक करना और समय-समय पर चार्ज भरना लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है.

एक मुख्य अकाउंट होना सबसे जरूरी
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति के पास कम से कम एक ऐसा मुख्य बैंक अकाउंट जरूर होना चाहिए, जहां सैलरी या नियमित आय आए और रोजमर्रा के खर्च पूरे हों. किराया, EMI, बीमा प्रीमियम, बिजली बिल और सब्सक्रिप्शन जैसी सभी जरूरी पेमेंट्स इसी अकाउंट से होने पर पैसों का हिसाब रखना आसान हो जाता है. अगर पैसा अलग-अलग खातों में बंटा रहता है तो खर्च और बचत दोनों को ट्रैक करना कठिन हो सकता है. यही वजह है कि एक स्थिर और नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाला अकाउंट वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है.

दूसरा अकाउंट बचत और इमरजेंसी के लिए फायदेमंद
कई लोग अपने खर्च और बचत को अलग रखने के लिए दूसरा बैंक अकाउंट इस्तेमाल करते हैं और यह तरीका काफी उपयोगी माना जाता है. इससे इमरजेंसी फंड या भविष्य के लिए रखी गई रकम रोजमर्रा के खर्च में इस्तेमाल होने से बच जाती है. कुछ परिवार घरेलू खर्च के लिए अलग जॉइंट अकाउंट भी रखते हैं, जबकि व्यक्तिगत खर्च के लिए अलग खाते बनाए रखते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि दो या तीन अकाउंट तक व्यवस्था संभालना आसान रहता है. लेकिन जब खातों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो लोग सिर्फ चार्ज या पेनल्टी से बचने के लिए एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करते रहते हैं. इससे वित्तीय प्रबंधन और जटिल हो जाता है.

ज्यादा अकाउंट मतलब ज्यादा फायदा नहीं
कई लोग सोचते हैं कि अलग-अलग बैंकों में ज्यादा खाते रखने से ज्यादा ब्याज मिलेगा, लेकिन हकीकत इससे अलग है. सामान्य सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज बहुत ज्यादा नहीं होता. ऐसे में कई खातों में पैसा बांटने से बड़ा फायदा नहीं मिलता. उल्टा, लोग बेहतर निवेश विकल्प जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से चूक सकते हैं. इसके अलावा निष्क्रिय पड़े खातों पर बैंक चार्ज भी लग सकते हैं. कई बार पुराने सैलरी अकाउंट, जिनका इस्तेमाल बंद हो चुका होता है, अनावश्यक बोझ बन जाते हैं. इसलिए समय-समय पर यह देखना जरूरी है कि कौन सा खाता वास्तव में उपयोगी है और कौन सिर्फ अतिरिक्त जिम्मेदारी बन चुका है.

कब ज्यादा बैंक अकाउंट रखना सही माना जाता है?
हालांकि कुछ परिस्थितियों में कई बैंक अकाउंट रखना जरूरी भी हो सकता है. उदाहरण के लिए बिजनेस और पर्सनल फाइनेंस को अलग रखने के लिए अलग खाते उपयोगी होते हैं. विदेश में काम करने वालों या अलग-अलग देशों में लेनदेन करने वाले लोगों को भी कई अकाउंट की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा कुछ लोन या सरकारी योजनाओं से जुड़े विशेष अकाउंट भी जरूरी हो सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि हर खाते का एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए. सामान्य नौकरीपेशा परिवारों के लिए दो से तीन बैंक अकाउंट काफी माने जाते हैं- एक मुख्य खर्च के लिए, दूसरा बचत के लिए और जरूरत पड़ने पर तीसरा जॉइंट या बैकअप अकाउंट. कम अकाउंट रखने से सिर्फ पैसे का बेहतर प्रबंधन नहीं होता, बल्कि मानसिक तनाव और वित्तीय उलझन भी कम होती है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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