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Jhangore Ki Kheer: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में झंगोरा (Barnyard Millet) को पौष्टिक अन्न माना जाता है. यह मुख्यतः बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा जिलों के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है. झंगोरा ग्लूटेन-फ्री होता है, और इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम व प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है.
झंगोरा उत्तराखंड के पारंपरिक और पौष्टिक अनाज में से एक है. यह खासकर बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा में उगाया जाता है. झंगोरा ठंडे मौसम और पहाड़ी मिट्टी में अच्छी तरह से पनपता है. इसमें ग्लूटेन नहीं होता है, जिससे यह पाचन के लिए हल्का और सेहतमंद होता है. किसान इसे बरसात के मौसम में बोते हैं, और तीन महीने में इसकी फसल तैयार हो जाती है. झंगोरा को अब सुपरफूड की श्रेणी में शामिल किया गया है.

बागेश्वर: झंगोरे की खीर उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई है, जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसे दूध, गुड़ और सूखे मेवों से बनाया जाता है. यह न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि ऊर्जा से भरपूर भी है. उपवास या त्योहारों के दौरान इसे खासतौर पर बनाया जाता है. इसकी मलाईदार बनावट और हल्का स्वाद इसे बच्चों और बुजुर्गों दोनों की पसंद बनाता है.

बागेश्वर: झंगोरा लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला अनाज है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. इसमें मौजूद फाइबर शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है, और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता है. बागेश्वर के डॉ. ऐजल पटेल भी गेहूं या चावल की जगह झंगोरे के सेवन की सलाह देते हैं. इसे खिचड़ी, खीर या दलिया के रूप में आसानी से डाइट में शामिल किया जा सकता है.

बागेश्वर: झंगोरे में मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम हृदय को स्वस्थ रखते हैं, और रक्तचाप को संतुलित करते हैं. इसका नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल कम करता है और हृदय रोगों के खतरे को घटाता है. उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में लोग इसे रोजाना के भोजन में शामिल करते हैं. यह दिल को मजबूत बनाने के साथ शरीर में ऊर्जा भी बनाए रखता है.

बागेश्वर: जो लोग वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं, उनके लिए झंगोरा एक आदर्श भोजन है. इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे भूख देर तक नहीं लगती है. झंगोरे की खीर या दलिया सुबह के नाश्ते में लेना फायदेमंद होता है. यह शरीर में फैट जमा नहीं होने देता और पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है.

बागेश्वर: झंगोरा उत्तराखंड के पहाड़ी किसानों की आय का बड़ा स्रोत बनता जा रहा है. कम पानी और कम मेहनत में उग जाने के कारण इसकी खेती किफायती मानी जाती है. सरकार भी मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए झंगोरा उत्पादन पर प्रोत्साहन दे रही है. इससे पहाड़ की पारंपरिक खेती को नया जीवन मिल रहा है.

बागेश्वर: झंगोरे का दलिया सुबह के नाश्ते में एक पौष्टिक और हल्का विकल्प है. इसे दूध या सब्जियों के साथ पकाकर बनाया जा सकता है. यह शरीर को पूरे दिन ऊर्जा देता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. बच्चे और बुजुर्ग दोनों के लिए यह सुपाच्य और स्वादिष्ट भोजन है.

बागेश्वर: एक कप झंगोरा धोकर 15 मिनट पानी में भिगो दें. फिर इसे दूध में धीमी आंच पर पकाएं. झंगोरा नरम होने पर गुड़ या चीनी डालें और इलायची पाउडर से खुशबू बढ़ाएं. ऊपर से बादाम, काजू और किशमिश डालकर सजाएं. यह खीर खासतौर पर त्योहारों, उपवास और पारिवारिक आयोजनों में बनाई जाती है. इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है.

