फसलों को बर्बाद करने वाली नीलगाय (रोजड़े) को अब जिले से बाहर करेंगे। वन विभाग ने प्लानिंग कर चंदेसरा से लेकर नरवर तक के क्षेत्र को चुना है। सर्वे करवाकर नीलगायों को ट्रैक करना भी शुरू कर दिया है। 8-10 और इससे ज्यादा के झुंड में दिखाई देने वाले मवेशियों के रास्ते चिह्नित हो गए हैं। डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार रेस्क्यू के लिए सेटअप मंगवा लिया है। चिह्नित पाइंट पर फीट करते हुए जल्द ही नीलगायों को पकड़ने के लिए रेस्क्यू शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए अफ्रीकन बोमा पद्धति का प्रयोग होगा। रेस्क्यू नीलगायों को जिले से बाहर सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इनके कारण किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए रेस्क्यू टीम को प्रशिक्षित करते हुए उन्हें तैयार कर दिया है। मंदसौर और शाजापुर के बाद उज्जैन में होगा रेस्क्यू: नीलगायों के रेस्क्यू के लिए करीब 7-8 साल पहले मंदसौर में बोमा पद्धति से पहला रेस्क्यू हुआ था। इसके बाद इसी साल शाजापुर जिले में बोमा पद्धति से हिरणों का रेस्क्यू किया गया। इसमें कुछ नीलगाय भी पकड़ाई थी। इनसे जान का भी जोखिम, चार लोगों की मौत हो चुकी सिलारखेड़ी निवासी दिलीपसिंह सिसौदिया ने बताया नीलगायों के कारण फसलों के नष्ट होने का खतरा तो है ही, अब जान का जोखिम भी खड़ा हो गया। खासकर देवास-बदनावर हाइवे पर तेज स्पीड से निकलने वाले वाहन चालक इन नीलगायों के कारण हादसे का शिकार हो रहे हैं। खासकर रात के समय ये जानवर सड़क पार करने के लिए अचानक दौड़ लगाते हैं। इस दौरान बाइक व कार से भी टकरा जाने से आए दिन इस तरह के हादसे होने लगे हैं। चंदेसरा से नरवर के बीच ही इस तरह के हादसों में 4 लोग जान तक गंवा चुके हैं। चुनौती : चारों तरफ खुली जगह उज्जैन में नीलगायों का रेस्क्यू चुनौती रहेगा, क्योंकि जिस क्षेत्र में रेस्क्यू होना है वहां चारों तरफ खुली जगह है। इस कारण बोमा सेटअप लगाना और वहां तक जानवरों को लाने में परेशानी होगी, क्योंकि नीलगाय एक पॉवरफुल अफ्रीकन जानवर है, जो ग्रुप में तो रहता है। महंगे रेस्क्यू के कारण बदलाव वैसे बोमा सेटअप (पिंजरेनुमा सिस्टम) लगाकर हेलीकॉप्टर से मवेशियों को हांका जाता है, लेकिन यह बहुत मंहगा रेस्क्यू है। इस कारण उज्जैन में बोमा सेटअप लगाकर ढोल आदि बचाते हुए शोर मचाते हुए नीलगायों को हांकते हुए टारगेट तक पहुंचाएंगे।
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अफ्रीकन बोमा पद्धति से होगा रेस्क्यू: नरवर में फसल चौपट करने वाली नीलगायों को जिले से बाहर छोड़ेंगे – Ujjain News
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